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Sikar गांव में यदि कोई पेड़ काटता है तो लगाने पड़ते हैं पांच पौधे नतीजा-3 साल में लगे दो हजार पेड़

GANGANAGAR

राजस्थान न्यूज़ डेस्क !!! हरियाली की ये पहरेदारी गांव के लोग अपनी मर्जी से करते आ रहे हैं। इस प्रयास का नतीजा ये है कि तीन साल में गांव में दाे हजार से ज्यादा पेड़ लग चुके हैं। यहां हर घर में आठ से 10 पेड़ लगे हैं। असामाजिक तत्वाें द्वारा गाेचर, जाेहड़ व श्मशान भूमि पर कब्जा किया जा रहा था। गांव के मौजिज लोगों ने श्मशान व गोचर भूमि का सीमांकन किया। पूर्व सरपंच भागीरथसिंह जेरठी, शिक्षाविद महादेव सिंह काजला, भानाराम सैन, रणवीर सिंह व बीएसएफ से रिटायर्ड सीताराम सैन आदि ने मीटिंग बुलाकर समस्या के स्थाई समाधान के लिए इन जमीनों की सींव पर पौधे लगाने का फैसला किया।खबरों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि,गांव के विकास काजला सीकर सेवा नाम से एनजीओ भी चलाते हैं। वे बताते हैं कि बुजुर्गाें की एक कमेटी बनी हुई है जाे पेड़ काटने वालों पर नजर रखती है।

पहचान कर उसे पांच पौधे लगाने के लिए प्रेरित करती है। गांव में पर्यावरण के प्रति सजगता का उदाहरण ये है कि कुछ दिन पहले गांव में पशु चराने वालों ने चोरी-छिपे पेड़ों की कटाई शुरू कर दी। गांव के जागरूक समूह ने पांच दिन में यह पता लगा लिया कि यह किसने किया। इसके बाद सार्वजनिक तौर पर स्वीकाने पर दोनों से पांच-पांच पौधे लगवाए। गांव में पेड़ काटने पर पूरी तरह से पाबंदी है। यदि कोई ऐसा करता है तो शर्त के तौर पर उसे पांच पौध लगाने पड़ते हैं। बताया जा रहा है कि,ग्रामीणों की शर्त रहती है कि गांव में अगर कोई हरा पेड़ काटता है तो संबंधित परिवार को इसके बदले पांच पौधे अतिरिक्त लगाने पड़ते हैं।

 सार्वजनिक रूप से दुबारा ऐसा नहीं करने की शपथ दिलाई जाती है। यदि काेई ज्यादा से ज्यादा पेड़-पाैधे गांव में लगाता है ताे उसे ग्राम पंचायत सम्मानित करती है। गांव का शिक्षा प्रतिशत 78 फीसदी है। गांव में खुले में शौच पर पाबंदी है। युवाओं का जय हिंद युवा विकास क्लब है, जाे पर्यावरण संरक्षण के साथ खेलकूद के आयाेजन और जरूरतमंद बच्चाें की विभिन्न प्रकार से मदद करता है।

सीकर न्यूज़ डेस्क !!!

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