ज्वैलरी इंडस्ट्री पर कितना पड़ेगा असर? पीएम मोदी की सोना न खरीदने की अपील पर कोटा ज्वेलर्स की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जिसमें उन्होंने अनावश्यक रूप से सोना खरीदने से बचने और बचत व निवेश के वैकल्पिक साधनों पर ध्यान देने की बात कही, के बाद देशभर में ज्वैलरी इंडस्ट्री में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस बयान के संभावित असर को लेकर कोटा के ज्वेलर्स और कारोबारी वर्ग ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कोटा के प्रमुख सर्राफा कारोबारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह अपील सीधे तौर पर ज्वैलरी बाजार पर तुरंत बड़ा असर नहीं डालेगी, लेकिन लंबे समय में उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है। उनका कहना है कि भारत में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और सामाजिक रीति-रिवाजों से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी मांग पूरी तरह से प्रभावित होना आसान नहीं है।
स्थानीय ज्वैलर्स ने बताया कि शादी-ब्याह के सीजन में सोने की खरीदारी में कोई खास गिरावट नहीं देखी जा रही है। हालांकि, कुछ ग्राहकों में निवेश को लेकर जागरूकता बढ़ी है और वे अब गोल्ड ज्वैलरी के बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड बॉन्ड और अन्य वित्तीय विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।
एक वरिष्ठ ज्वैलर का कहना है कि सोने की कीमतों में पहले से ही उतार-चढ़ाव जारी है, और ऐसे में सरकार की अपील का असर अधिकतर भावनात्मक और दीर्घकालिक हो सकता है, न कि तात्कालिक। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय उपभोक्ता सोने को केवल संपत्ति नहीं बल्कि भावनात्मक सुरक्षा के रूप में भी देखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार की ओर से सोने के विकल्पों को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, तो धीरे-धीरे निवेश के पैटर्न में बदलाव संभव है। लेकिन ज्वैलरी इंडस्ट्री का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ग्रामीण और पारंपरिक बाजार पर निर्भर है, जहां सोने की मांग स्थिर बनी रहती है।
कोटा सर्राफा एसोसिएशन के सदस्यों ने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों और बाजार की वास्तविकता के बीच संतुलन जरूरी है। उनका मानना है कि ज्वैलरी सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

