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भारत की सबसे बड़ी नहर कैसे बनी 'गंगानहर' से 'इंदिरा गांधी नहर' जानें पूरी कहानी
 

भारत की सबसे बड़ी नहर कैसे बनी 'गंगानहर' से 'इंदिरा गांधी नहर' जानें पूरी कहानी

इंदिरा गांधी नहर को राजस्थान की “भागीरथी” कहा जाता है, क्योंकि इसने थार के रेगिस्तान में पानी पहुंचाकर जीवन की नई धारा बहाई। जिस तरह पौराणिक कथाओं में भगीरथ को गंगा को धरती पर लाने का श्रेय दिया जाता है, उसी तरह इस नहर को रेगिस्तान में हरियाली और विकास लाने का प्रतीक माना जाता है।

बहुत कम लोग जानते हैं कि इस परियोजना को शुरुआत में “राजस्थान नहर परियोजना” के नाम से जाना जाता था। इसका उद्देश्य पश्चिमी राजस्थान के सूखे और रेतीले इलाकों तक सतलुज और ब्यास नदियों का पानी पहुंचाना था, ताकि वहां खेती और जीवन संभव हो सके।

बाद में वर्ष 1984 में इस परियोजना का नाम बदलकर इंदिरा गांधी के नाम पर “इंदिरा गांधी नहर” कर दिया गया। इसके बाद यह नहर देश की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल हो गई।

इस नहर ने बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर जैसे इलाकों की तस्वीर पूरी तरह बदल दी। जहां पहले केवल रेत के टीले और सूखा दिखाई देता था, वहां अब खेतों में फसलें लहलहाने लगीं। लाखों हेक्टेयर जमीन सिंचित हुई और हजारों गांवों को पीने का पानी मिला।

स्थानीय लोगों के जीवन में भी बड़ा बदलाव आया। खेती, पशुपालन और व्यापार को नई ताकत मिली, जिससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई। यही कारण है कि इस नहर को आज भी “रेगिस्तान की जीवनरेखा” कहा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इंदिरा गांधी नहर केवल एक सिंचाई परियोजना नहीं, बल्कि मानव प्रयास और दूरदर्शिता की मिसाल है। इसने यह साबित किया कि कठिन से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को भी योजनाबद्ध विकास से बदला जा सकता है।

आज भी पश्चिमी राजस्थान के लोग इस नहर को सम्मान और गर्व के साथ याद करते हैं और इसे “राजस्थान की भागीरथी” कहकर संबोधित करते हैं।

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