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भारत की सबसे बड़ी नहर कैसे बनी ‘गंगानहर’ से ‘इंदिरा गांधी नहर’, जानें पूरी कहानी

भारत की सबसे बड़ी नहर कैसे बनी ‘गंगानहर’ से ‘इंदिरा गांधी नहर’, जानें पूरी कहानी

इंदिरा गांधी नहर केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि भारत की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में से एक मानी जाती है। थार मरुस्थल की सूखी धरती तक पानी पहुंचाने वाली इस विशाल नहर ने पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर बदल दी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आज जिसे “इंदिरा गांधी नहर” कहा जाता है, उसका प्रारंभिक नाम “राजस्थान नहर” और उससे पहले “गंगानहर” की अवधारणा से जुड़ा हुआ था।

मरुस्थल में पानी लाने का सपना

राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों—विशेषकर बीकानेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर और बाड़मेर—में पानी की भारी कमी हमेशा बड़ी समस्या रही। अंग्रेजी शासनकाल में बीकानेर रियासत के महाराजा महाराजा गंगासिंह ने पंजाब की नदियों का पानी रेगिस्तान तक लाने का सपना देखा था।

इसी सोच के तहत सतलुज नदी के पानी को राजस्थान तक पहुंचाने की योजना बनी। बाद में बीकानेर क्षेत्र में बनी नहर को “गंग नहर” या “गंग कैनाल” कहा गया, जिसका नाम महाराजा गंगासिंह के नाम पर पड़ा। यह उस समय रेगिस्तानी क्षेत्र के लिए जीवनरेखा साबित हुई।

आजादी के बाद बनी बड़ी योजना

स्वतंत्रता के बाद पश्चिमी राजस्थान में पानी की समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने बड़ी सिंचाई परियोजना की योजना बनाई। इसके तहत पंजाब की सतलुज और ब्यास नदियों के पानी को राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों तक पहुंचाने का फैसला लिया गया।

1958 में तत्कालीन गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने इस परियोजना का शिलान्यास किया। शुरुआत में इसका नाम “राजस्थान नहर परियोजना” रखा गया था।

कैसे बना ‘इंदिरा गांधी नहर’ नाम

वर्ष 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद राजस्थान नहर परियोजना का नाम बदलकर “इंदिरा गांधी नहर परियोजना” कर दिया गया। इसके बाद यह नहर पूरे देश में इसी नाम से प्रसिद्ध हो गई।

दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल

इंदिरा गांधी नहर लगभग 650 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर प्रणाली है, जो पंजाब के हरिके बैराज से शुरू होकर राजस्थान के कई जिलों तक पहुंचती है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजनाओं में भी गिना जाता है।

इस परियोजना ने श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे क्षेत्रों की कृषि व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया। जहां कभी केवल रेत के टीले दिखाई देते थे, वहां आज गेहूं, सरसों, कपास और अन्य फसलें लहलहाती नजर आती हैं।

रेगिस्तान में आई हरियाली

नहर आने के बाद पश्चिमी राजस्थान में खेती, पेयजल और पशुपालन को नई जिंदगी मिली। लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित हुई और हजारों गांवों तक पानी पहुंचा। इससे लोगों का जीवनस्तर सुधरा और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिली।

हालांकि समय के साथ नहर क्षेत्र में जलभराव और भूमि क्षारीकरण जैसी समस्याएं भी सामने आईं, लेकिन इसके बावजूद इंदिरा गांधी नहर को राजस्थान की “जीवन रेखा” माना जाता है।

इतिहास और विकास की अनोखी कहानी

‘गंगानहर’ से ‘इंदिरा गांधी नहर’ बनने तक की यह यात्रा केवल नाम बदलने की कहानी नहीं, बल्कि राजस्थान के रेगिस्तान को हरियाली में बदलने वाले एक ऐतिहासिक विकास अभियान की कहानी है। यह परियोजना आज भी देश की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जल परियोजनाओं में शामिल है।

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