जालोर में कागजों पर चल रहा छात्रावास? डीटीएनटी हॉस्टल में न बच्चे मिले, न वार्डन; 2 साल में खर्च हुए 42 लाख रुपए
राजस्थान के जालोर जिले के सायला ब्लॉक के केशवाना में विमुक्त घुमन्तू-अर्द्धघुमन्तु समुदाय (डीटीएनटी) बच्चों के लिए संचालित छात्रावास को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विभागीय दावों के अनुसार जहां इस छात्रावास में 50 बच्चों के रहने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, वहीं हकीकत में स्थिति इससे अलग बताई जा रही है। जांच में न तो 50 बच्चे मिले, न वार्डन, न रसोईया और न ही चौकीदार की मौजूदगी सामने आई।
जानकारी के अनुसार, यह छात्रावास पिछले करीब 2 साल से संचालित बताया जा रहा है। इसके संचालन पर हर साल करीब 21 लाख रुपए खर्च होने का दावा किया गया है। यानी दो साल में इस पर लगभग 42 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन मौके की स्थिति ने व्यवस्थाओं और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि विभागीय रिकॉर्ड में छात्रावास में बच्चों की संख्या और कर्मचारियों की नियुक्ति दर्ज है, लेकिन जमीनी हकीकत में इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी। मौके पर बच्चों की अनुपस्थिति और जरूरी स्टाफ नहीं मिलने से छात्रावास के संचालन को लेकर संदेह पैदा हो गया है।
स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि यदि छात्रावास में वास्तव में बच्चे नहीं रह रहे थे तो फिर उनके नाम पर सुविधाओं और बजट का संचालन कैसे होता रहा। वहीं, यदि कर्मचारी नियुक्त थे तो उनकी नियमित उपस्थिति और जिम्मेदारियों की निगरानी क्यों नहीं की गई।
डीटीएनटी समुदाय के बच्चों की शिक्षा और आवासीय सुविधा के उद्देश्य से ऐसे छात्रावास संचालित किए जाते हैं, ताकि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के बेहतर अवसर मिल सकें। लेकिन यदि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएं तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं बच्चों को उठाना पड़ता है, जिनके लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।
मामला सामने आने के बाद अब विभागीय स्तर पर जांच की मांग उठ रही है। अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे रिकॉर्ड, बजट खर्च, कर्मचारियों की नियुक्ति और छात्रावास में बच्चों की वास्तविक संख्या की जांच करेंगे।
फिलहाल इस मामले ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

