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सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत पर हाईकोर्ट सख्त, फुटेज में जानें शिक्षा सचिव से बोला- बच्चियों के लिए टॉयलेट तक नहीं, कैसे पढ़ेंगे बच्चे?

सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत पर हाईकोर्ट सख्त, फुटेज में जानें शिक्षा सचिव से बोला- बच्चियों के लिए टॉयलेट तक नहीं, कैसे पढ़ेंगे बच्चे?

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्कूलों की जर्जर इमारतों, क्लासरूम की खराब हालत और विशेष रूप से छात्राओं के लिए शौचालय की कमी पर गंभीर चिंता जताई।

सोमवार को जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ झालावाड़ स्कूल हादसे को लेकर स्वप्रेरणा से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान शिक्षा विभाग की व्यवस्थाओं पर अदालत ने तीखी नाराजगी व्यक्त की और शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल से सीधे सवाल किए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, “आप स्वच्छ भारत मिशन की बात करते हैं, लेकिन स्कूलों में बच्चियों के लिए टॉयलेट तक की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं।” अदालत ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे छात्राओं की पढ़ाई पर गंभीर असर पड़ रहा है।

न्यायाधीशों ने कहा कि कई स्कूलों में शौचालयों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चियां पानी तक नहीं पीतीं, क्योंकि उन्हें बार-बार टॉयलेट जाने में परेशानी होती है। इससे उनकी सेहत और शिक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, “हम बच्चों और समाज को जवाब नहीं दे पा रहे हैं।”

खंडपीठ ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरत में इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। स्कूलों की जर्जर इमारतें बच्चों की सुरक्षा के लिए खतरा बनी हुई हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

अदालत ने शिक्षा सचिव को निर्देश दिए कि वे इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर लें और मुख्य सचिव तथा वित्त सचिव से मिलकर स्कूलों की आधारभूत सुविधाओं के लिए बजट में विशेष फंड का प्रावधान सुनिश्चित करें। कोर्ट ने साफ किया कि बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब शिक्षा विभाग पर जल्द ठोस कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। प्रदेशभर में हजारों सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई है।

इस सुनवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब तक स्कूलों में सुरक्षित भवन, साफ शौचालय और जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य कैसे हासिल किया जा सकेगा। अदालत की टिप्पणी ने सरकार को शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गंभीरता से कदम उठाने का स्पष्ट संदेश दे दिया है।

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