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हनुमानगढ़ के जवान सुरेश कुमार ज्याणी लेह लद्दाख में ड्यूटी के दौरान शहीद

हनुमानगढ़ के जवान सुरेश कुमार ज्याणी लेह लद्दाख में ड्यूटी के दौरान शहीद

राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गांव फेफाना निवासी भारतीय सेना के जवान सुरेश कुमार ज्याणी का निधन हो गया। वे 21 जाट रेजिमेंट में तैनात थे और वर्तमान में लेह लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्र में ड्यूटी कर रहे थे।

सूत्रों के अनुसार, कठिन मौसम और बर्फीली परिस्थितियों के बीच जवान की तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें बचाने में सफलता नहीं पाई। सेना ने जवान की शहादत की जानकारी परिवार और अधिकारियों को तुरंत दी।

सुरेश कुमार ज्याणी की शहादत से उनके परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि सुरेश कुमार ने सेना में सेवा करते हुए अपने कर्तव्य और देशभक्ति की भावना का उच्चतम उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गांव का हर व्यक्ति उनके पराक्रम और त्याग को हमेशा याद रखेगा।

भारतीय सेना के अधिकारियों ने कहा कि जवानों की ड्यूटी लेह लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कठिन मौसम और बर्फीली परिस्थितियों में होती है, जहां हर पल चुनौतीपूर्ण और खतरनाक होता है। उन्होंने सुरेश कुमार की शहादत को देश के लिए सर्वोच्च बलिदान बताया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे जवान जो सीमाओं पर अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं, उनका त्याग और साहस अनमोल है। उन्होंने बताया कि जवानों के परिजनों का मनोबल बनाए रखना और उन्हें हर संभव सहायता उपलब्ध कराना राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

हनुमानगढ़ जिले में सुरेश कुमार के निधन की खबर मिलते ही सरकारी और सामाजिक स्तर पर श्रद्धांजलि व्यक्त की जा रही है। प्रशासन ने जवान के परिवार से संपर्क कर उन्हें हर संभव सहायता और मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।

स्थानीय युवाओं ने कहा कि सुरेश कुमार जैसी शहादत हमें देशभक्ति और कर्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे जवानों की कहानियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना समाज और राष्ट्र की जिम्मेदारी है।

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि जवानों की शहादत केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह पूरे देश के लिए प्रेरणा और गर्व का कारण बनती है। सुरेश कुमार ज्याणी की शहादत ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सेना के जवान देश की सीमाओं की रक्षा के लिए हर चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार रहते हैं।

कुल मिलाकर, हनुमानगढ़ के सुरेश कुमार ज्याणी की शहादत न केवल उनके परिवार और गांव के लिए बल्कि पूरे देश के लिए अमर उदाहरण और प्रेरणा बन गई है। उनका साहस, त्याग और देशभक्ति हमेशा याद रखी जाएगी।

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