हनुमान बेनीवाल ने विदेश मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, वायरल वीडियो में देंखे प्रधानमंत्री को जताई नाराजगी
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने विदेश मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी नाराजगी जाहिर की है। बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा हमला बोला है।
हनुमान बेनीवाल ने अपने बयान में कहा कि विदेश मंत्रालय में सांसदों और आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सांसदों को मिलने तक का समय नहीं दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी चिंताजनक है।
बेनीवाल ने विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह की कार्यप्रणाली और अधिकारों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विदेश राज्य मंत्री की स्थिति इतनी कमजोर हो गई है कि उनके कहने पर भी संसद भवन स्थित उनके कार्यालय में पीड़ितों के लिए प्रवेश पास तक नहीं बन पा रहे हैं। बेनीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसे विदेश राज्य मंत्री की “लाचारी का प्रतीक” करार दिया।
नागौर सांसद ने तीखे शब्दों में कहा कि जब किसी मंत्री के पास अपने ही कार्यालय में आगंतुकों को बुलाने की शक्ति नहीं है, तो ऐसे मंत्री से देश के महत्वपूर्ण विदेशी मामलों को प्रभावी ढंग से संभालने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उन्होंने इसे शासन प्रणाली में गंभीर खामी बताया।
हनुमान बेनीवाल ने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय से जुड़े कई मामलों में पीड़ित लोग महीनों तक भटकते रहते हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो पाती। सांसद होने के बावजूद अगर उन्हें समय और सहयोग नहीं मिल रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेनीवाल का यह बयान न केवल विदेश मंत्रालय की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, बल्कि केंद्र सरकार के भीतर समन्वय और जवाबदेही को लेकर भी गंभीर संकेत देता है। विपक्षी दल पहले भी कई बार यह आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्रीय मंत्रियों तक पहुंच आम सांसदों और जनता के लिए कठिन होती जा रही है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर विदेश मंत्रालय या संबंधित मंत्रियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन बेनीवाल के बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
उल्लेखनीय है कि हनुमान बेनीवाल पहले भी केंद्र और राज्य सरकारों के खिलाफ खुलकर बयान देते रहे हैं। वे किसान, युवाओं और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों को लेकर अक्सर सरकार पर हमलावर रहते हैं। इस बार उनका निशाना विदेश मंत्रालय की कार्यप्रणाली रही, जिसने सत्ता पक्ष के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है।
अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री कार्यालय या विदेश मंत्रालय इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या सांसदों की शिकायतों को लेकर कोई सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं या नहीं।

