ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी, मुआवजे की उम्मीद अधर में
बूंदी जिले के किसान बीते वर्ष हुई ओलावृष्टि और लगातार मूसलाधार बारिश के चलते गहरे संकट में हैं। जिले में धान, सोयाबीन, मक्का और उड़द जैसी प्रमुख फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं, जिससे किसानों की आर्थिक हालत बेहद कमजोर हो गई है।
कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, किसानों की फसलें नष्ट होने के बावजूद तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मुआवजे की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के किसान निराश और परेशान हैं।
किसानों का कहना है कि फसल खराब होने के बाद उन्होंने सरकारी राहत और मुआवजे की उम्मीद लगाए रखी थी, लेकिन अब उनका धैर्य जवाब देने लगा है। कई किसान बैंकों से ऋण चुकाने और परिवार चलाने में भी संघर्ष कर रहे हैं।
स्थानीय पंचायतों और किसान संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि फौरी राहत राशि और मुआवजा तुरंत जारी किया जाए ताकि किसान आर्थिक तंगी से उबर सकें। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि मुआवजा देने की प्रक्रिया तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से धीमी हुई है, लेकिन इसे जल्द पूरा किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर मुआवजा और राहत न मिलने से केवल किसानों की स्थिति बिगड़ेगी, बल्कि जिले में कृषि क्षेत्र की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता पर भी असर पड़ेगा। इस बीच, बूंदी के किसानों की निगाहें सरकार और प्रशासन की ओर टिकी हुई हैं, जो अब तक केवल वादे कर रही है, लेकिन राहत राशि की रफ्तार अभी तक उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखाई दी है।

