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यूनेस्को विश्व धरोहर दर्जा बचाने को सरकार सख्त, परकोटा क्षेत्र में मुख्य सचिव ने किया निरीक्षण

राजधानी के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र के यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के दर्जे को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने अब सीधे मोर्चा संभाल लिया है। इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर तेजी लाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर हालात का निरीक्षण शुरू कर दिया है।  जयपुर परकोटा क्षेत्र में मंगलवार को स्वयं मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे तक क्षेत्र की गलियों में पैदल भ्रमण कर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण, संरक्षण कार्यों और शहरी ढांचे की स्थिति को बारीकी से देखा।  निरीक्षण के बाद मुख्य सचिव ने नगर निगम मुख्यालय में अधिकारियों के साथ लगभग एक घंटे लंबी बैठक भी की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि परकोटा क्षेत्र के संरक्षण और विकास कार्यों को मिशन मोड में चलाया जाए, ताकि यूनेस्को द्वारा दिए गए विश्व धरोहर दर्जे को किसी भी स्थिति में खतरा न पहुंचे।  नगर निगम जयपुर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने, स्वच्छता व्यवस्था सुधारने और ऐतिहासिक धरोहर स्थलों के संरक्षण कार्यों में तेजी लाई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि विकास कार्यों के दौरान विरासत की मूल पहचान प्रभावित न हो।  मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो विश्व धरोहर दर्जे पर संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसका सीधा असर पर्यटन और शहर की वैश्विक पहचान पर पड़ेगा।  यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त जयपुर का परकोटा क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक हवेलियों, बाजारों और स्थापत्य कला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। ऐसे में इसके संरक्षण को लेकर सरकार की यह सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।  स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र की मूल पहचान सुरक्षित रहेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।  कुल मिलाकर, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के दर्जे को बनाए रखने के लिए सरकार की यह सख्त और सक्रिय पहल जयपुर के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

राजधानी के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र के यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के दर्जे को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने अब सीधे मोर्चा संभाल लिया है। इस दिशा में प्रशासनिक स्तर पर तेजी लाते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने जमीनी स्तर पर हालात का निरीक्षण शुरू कर दिया है।

जयपुर परकोटा क्षेत्र में मंगलवार को स्वयं मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास पहुंचे और करीब डेढ़ घंटे तक क्षेत्र की गलियों में पैदल भ्रमण कर मौजूदा स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण, संरक्षण कार्यों और शहरी ढांचे की स्थिति को बारीकी से देखा।

निरीक्षण के बाद मुख्य सचिव ने नगर निगम मुख्यालय में अधिकारियों के साथ लगभग एक घंटे लंबी बैठक भी की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि परकोटा क्षेत्र के संरक्षण और विकास कार्यों को मिशन मोड में चलाया जाए, ताकि यूनेस्को द्वारा दिए गए विश्व धरोहर दर्जे को किसी भी स्थिति में खतरा न पहुंचे।

नगर निगम जयपुर के अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण हटाने, स्वच्छता व्यवस्था सुधारने और ऐतिहासिक धरोहर स्थलों के संरक्षण कार्यों में तेजी लाई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि विकास कार्यों के दौरान विरासत की मूल पहचान प्रभावित न हो।

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो विश्व धरोहर दर्जे पर संकट उत्पन्न हो सकता है, जिसका सीधा असर पर्यटन और शहर की वैश्विक पहचान पर पड़ेगा।

यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त जयपुर का परकोटा क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक हवेलियों, बाजारों और स्थापत्य कला के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। ऐसे में इसके संरक्षण को लेकर सरकार की यह सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने भी प्रशासन की इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे क्षेत्र की मूल पहचान सुरक्षित रहेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

कुल मिलाकर, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के दर्जे को बनाए रखने के लिए सरकार की यह सख्त और सक्रिय पहल जयपुर के ऐतिहासिक परकोटा क्षेत्र के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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