राजस्थान में OBC आरक्षण पर सरकार का हाईकोर्ट में जवाब, वीडियो में कहा- आयोग की रिपोर्ट के आधार पर हुआ आरक्षण
राजस्थान में निकाय और पंचायतीराज चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा है। सरकार ने स्थानीय निकाय और आगामी पंचायत चुनावों में दिए गए ओबीसी आरक्षण को सही ठहराते हुए कहा है कि आरक्षण की प्रक्रिया ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर पूरी की गई है। सरकार के मुताबिक आयोग की सिफारिश के आधार पर लॉटरी के जरिए ओबीसी आरक्षण निर्धारित किया गया।
सरकार ने कोर्ट में बताया कि ओबीसी आयोग ने घर-घर सर्वे और उपलब्ध जनाधार डेटा का अध्ययन करने के बाद आरक्षण को लेकर अपनी सिफारिशें दी थीं। इसी रिपोर्ट के आधार पर स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का निर्धारण किया गया। वहीं इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से आरक्षण को लेकर अलग दलील रखी गई है।
दरअसल, ओबीसी आरक्षण को लेकर यह मामला जिला प्रमुख पदों की आरक्षण लॉटरी के बाद चर्चा में आया। 13 अगस्त को राजस्थान के 41 जिला परिषदों में जिला प्रमुख पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली गई थी। इसमें पांच जिला प्रमुख पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए थे। इसके बाद ओबीसी वर्ग को अपेक्षाकृत कम आरक्षण दिए जाने को लेकर सवाल उठाए गए और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।
याचिका में क्या कहा गया
सामाजिक कार्यकर्ता राधेलाल गोदारा की ओर से दायर याचिका में जिला प्रमुख पदों के आरक्षण को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया कि जिला परिषदों और नए जिलों के गठन के बाद जिला प्रमुख के पदों की संख्या बढ़कर 41 हो गई, लेकिन ओबीसी वर्ग को पदों के अनुपात में आरक्षण का लाभ नहीं मिला। इसी मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था।सरकार ने अपने जवाब में आरक्षण प्रक्रिया का बचाव करते हुए आयोग की रिपोर्ट को आधार बताया है। सरकार का कहना है कि आरक्षण तय करने की प्रक्रिया संबंधित आयोग के अध्ययन और सिफारिशों के आधार पर की गई।
पंचायत चुनाव की लॉटरी भी टली
ओबीसी आरक्षण को लेकर मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव की तैयारियां चल रही हैं। प्रधान, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और वार्ड पंचों के आरक्षण की लॉटरी का कार्यक्रम पहले तय किया गया था, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया। बाद में 17 और 18 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई, लेकिन निकाय चुनाव की प्रक्रिया के चलते इसे फिर टाल दिया गया।
अब आरक्षण लॉटरी के लिए नई तारीखें घोषित की जा चुकी हैं। प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के आरक्षण की लॉटरी 23 सितंबर को होगी, जबकि सरपंच और वार्ड पंचों के लिए आरक्षण की लॉटरी 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर निकाली जाएगी।लॉटरी के बाद पंचायत चुनाव की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। किस क्षेत्र में कौन सा पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा, इसका निर्धारण होने के बाद चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों की स्थिति भी स्पष्ट होगी। वहीं ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया पर भी आगे की सुनवाई में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।

