कोटा के लापता तालाबों पर सरकार सक्रिय, 5 तालाबों के संरक्षण के लिए 101 करोड़ का ऐलान
राजस्थान के कोटा शहर में कभी 19 तालाब हुआ करते थे, जो बरसाती पानी को संजोकर शहर को बाढ़ से बचाने और भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते थे। समय के साथ इन तालाबों की संख्या घटकर अब 12 रह गई है।
लापता और अतिक्रमण की चपेट में आए तालाबों का मुद्दा विधानसभा में उठने के बाद सरकार हरकत में आई है। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने पांच तालाबों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए 101 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की है। साथ ही संबंधित अधिकारियों को अतिक्रमण हटाने और सीमांकन की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार की इस घोषणा का पर्यावरण प्रेमियों ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही आशंका भी जताई है कि कहीं यह योजना केवल घोषणा बनकर न रह जाए। उनका कहना है कि जो तालाब पूरी तरह समाप्त हो चुके हैं, उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि तालाबों का संरक्षण केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा, गाद निकालने, वर्षा जल संचयन और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई जैसे कदम भी जरूरी हैं।
अब देखना होगा कि विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद घोषित बजट का धरातल पर कितना प्रभाव दिखता है और कोटा के ऐतिहासिक जलस्रोतों को कितनी राहत मिल पाती है।

