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चंबल घड़ियाल अभयारण्य से खुशखबरी: 200 अंडों में से 91 घड़ियाल शावक सुरक्षित निकले

चंबल घड़ियाल अभयारण्य से खुशखबरी: 200 अंडों में से 91 घड़ियाल शावक सुरक्षित निकले

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य के देवरी केंद्र से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। चंबल नदी से एकत्र किए गए 200 घड़ियाल अंडों में से 91 शावक सफलतापूर्वक सुरक्षित बाहर निकल आए हैं। इस उपलब्धि को घड़ियाल संरक्षण अभियान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इसे चंबल नदी की जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक बताया है।

संरक्षण अभियान को मिली नई सफलता

घड़ियाल भारत के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त जलीय जीवों में गिने जाते हैं। इनके संरक्षण के लिए राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में वर्षों से विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

इसी क्रम में चंबल नदी के विभिन्न क्षेत्रों से घड़ियालों के अंडे एकत्र कर देवरी केंद्र में सुरक्षित वातावरण में रखा गया था। निर्धारित समय पूरा होने के बाद इनमें से 91 शावक सफलतापूर्वक बाहर निकल आए हैं।

विशेषज्ञों की निगरानी में हुई पूरी प्रक्रिया

अंडों की सुरक्षा और हैचिंग प्रक्रिया वन्यजीव विशेषज्ञों तथा वन विभाग की टीम की निगरानी में पूरी की गई। तापमान, नमी और अन्य आवश्यक परिस्थितियों का विशेष ध्यान रखा गया ताकि अधिकतम संख्या में शावकों का सुरक्षित जन्म हो सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि शावकों के शुरुआती विकास चरण में उनकी विशेष देखभाल की जाएगी।

चंबल की जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण

घड़ियाल चंबल नदी के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनकी संख्या में वृद्धि से नदी की जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूती मिलेगी।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, घड़ियालों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि संरक्षण कार्यक्रम सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और उनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

भविष्य में नदी में छोड़े जाएंगे शावक

वन विभाग की योजना के अनुसार, शावकों को कुछ समय तक सुरक्षित केंद्र में रखा जाएगा ताकि वे पर्याप्त रूप से विकसित हो सकें। इसके बाद उन्हें प्राकृतिक आवास यानी चंबल नदी में छोड़ा जाएगा।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य घड़ियालों की प्राकृतिक आबादी को बढ़ाना और उनकी प्रजाति के संरक्षण को मजबूत करना है।

वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह

91 घड़ियाल शावकों के सुरक्षित जन्म की खबर से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों में उत्साह का माहौल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में घड़ियालों की संख्या में और वृद्धि देखने को मिल सकती है।

राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य लंबे समय से घड़ियाल संरक्षण का प्रमुख केंद्र रहा है और यह सफलता उस दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

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