कोटा निकाय चुनाव में Gen-Z की एंट्री, 37 युवा प्रत्याशियों ने निर्दलीय भरा नामांकन; अपनी सियासी पारी शुरू करने की तैयारी
राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कोटा नगर निगम की शहर की सरकार में अपनी जगह बनाने के लिए बड़ी संख्या में युवा चुनावी मैदान में उतर गए हैं। इस बार चुनाव में नई पीढ़ी यानी Gen-Z प्रत्याशियों की भागीदारी खास चर्चा का विषय बनी हुई है। मुख्य राजनीतिक दलों से टिकट नहीं मिलने या पार्टी के बजाय अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला करने वाले 37 युवा प्रत्याशियों ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल किया है।
इन युवा उम्मीदवारों का कहना है कि वे स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाना चाहते हैं और शहर के विकास में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। इनमें कई ऐसे युवा भी शामिल हैं, जिन्होंने पहली बार चुनावी राजनीति में कदम रखा है।
टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय मैदान में उतरे युवा
नगर निगम चुनाव में आमतौर पर प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला देखने को मिलता है, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में युवाओं ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है। कई युवाओं ने राजनीतिक दलों से टिकट की उम्मीद की थी, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने खुद के दम पर जनता के बीच जाने का निर्णय लिया।
कुछ प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो शुरुआत से ही किसी पार्टी के बजाय स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर के मुद्दों को उठाने के लिए उन्हें किसी राजनीतिक दल के समर्थन की जरूरत नहीं है।
सोशल मीडिया और नए प्रचार तरीकों का सहारा
Gen-Z प्रत्याशी चुनाव प्रचार के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। सोशल मीडिया, ऑनलाइन कैंपेन और युवाओं से सीधे संवाद के जरिए वे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
युवा प्रत्याशियों का फोकस रोजगार, स्वच्छता, सड़क, ट्रैफिक, शिक्षा, आधुनिक सुविधाओं और शहर की मूलभूत समस्याओं पर है। उनका कहना है कि वे नई सोच और नए तरीकों के साथ नगर निगम में बदलाव लाना चाहते हैं।
नगर निगम चुनाव में बढ़ी युवाओं की भागीदारी
राजनीति में युवाओं की भागीदारी को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बदलाव देखने को मिला है। अब बड़ी संख्या में युवा स्थानीय चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। नगर निगम जैसे चुनावों को राजनीति में प्रवेश का पहला कदम माना जाता है, जहां स्थानीय समस्याओं को सीधे समझने और समाधान करने का मौका मिलता है।
कोटा जैसे शिक्षा नगरी में युवाओं की बड़ी आबादी है। ऐसे में युवा प्रत्याशियों को उम्मीद है कि उनकी सोच और मुद्दे मतदाताओं को प्रभावित करेंगे।
बड़े दलों के सामने बढ़ी चुनौती
37 Gen-Z प्रत्याशियों के निर्दलीय मैदान में उतरने से प्रमुख राजनीतिक दलों के सामने भी चुनौती बढ़ गई है। निर्दलीय उम्मीदवार कई वार्डों में मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकते हैं।
हालांकि चुनाव में सफलता के लिए केवल नामांकन दाखिल करना काफी नहीं होगा। प्रत्याशियों को मजबूत जनसंपर्क, चुनावी रणनीति और मतदाताओं का भरोसा जीतना होगा।
फिलहाल कोटा नगर निगम चुनाव में युवाओं की यह भागीदारी राजनीतिक बदलाव के संकेत के रूप में देखी जा रही है। अब देखना होगा कि Gen-Z प्रत्याशियों की यह नई सियासी शुरुआत मतदाताओं के बीच कितना असर छोड़ पाती है।

