खड़गे के बयान पर गहलोत का बचाव, वीडियो में बोले- ‘नानी याद दिला देना’ आम बोलचाल का मुहावरा; भाजपा को हंगामे का अधिकार नहीं
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर की गई टिप्पणी पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दिल्ली से लेकर जयपुर तक कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने खड़गे का बचाव करते हुए भाजपा पर पलटवार किया है। गहलोत ने कहा कि खड़गे का उद्देश्य किसी का व्यक्तिगत अपमान करना नहीं था और उनकी टिप्पणी को आम बोलचाल की भाषा के संदर्भ में समझा जाना चाहिए।गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे भारत के सबसे अनुभवी राजनेताओं में से एक हैं। वे प्रधानमंत्री पद की गरिमा को समझते हैं और उनकी मंशा कभी भी इस गरिमा के खिलाफ नहीं हो सकती। गहलोत के मुताबिक, खड़गे की टिप्पणी का उद्देश्य किसी व्यक्ति या उसके परिवार का अपमान करना नहीं था।
‘नानी याद दिला देना’ जैसे मुहावरे आम बोलचाल का हिस्सा
अशोक गहलोत ने अपने पोस्ट में कहा कि ‘नानी याद दिला देना’ और ‘बाप की जागीर समझना’ जैसे रिश्तों से जुड़े मुहावरे और लोकोक्तियां भारतीय समाज की आम बोलचाल का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के वाक्यांश सदियों से भाषा में इस्तेमाल होते रहे हैं और कई बार उनका अर्थ शाब्दिक न होकर भावनात्मक या अलंकारिक होता है।गहलोत ने तर्क दिया कि खड़गे की टिप्पणी को भी इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, किसी मुहावरे का इस्तेमाल अपने आप में किसी व्यक्ति के परिवार का अपमान करने की मंशा साबित नहीं करता। उन्होंने भाजपा पर इस मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया।
अमित शाह के बयान का भी किया जिक्र
अपने बचाव में गहलोत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2025 में संसद में दिए गए एक बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संसद में बोलते समय अमित शाह ने ‘साला’ शब्द का इस्तेमाल किया था। गहलोत ने इस उदाहरण के जरिए तर्क दिया कि सार्वजनिक बहस में कभी-कभी ऐसे शब्दों का इस्तेमाल आम बोलचाल के संदर्भ में होता है।गहलोत का कहना है कि राजनीतिक बयानों का मूल्यांकन करते समय उनके संदर्भ और मंशा को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने भाजपा की आपत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे पर हंगामा करना उचित नहीं है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ी बयानबाजी
खड़गे की टिप्पणी को लेकर दोनों दलों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। भाजपा की ओर से इस बयान पर आपत्ति जताई जा रही है, जबकि कांग्रेस नेता इसे संदर्भ से जोड़कर देखे जाने की बात कह रहे हैं। अशोक गहलोत के बयान ने इस विवाद को राजस्थान की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना दिया है।फिलहाल विवाद का केंद्र खड़गे की टिप्पणी का अर्थ, उसकी मंशा और प्रधानमंत्री पद की गरिमा से जुड़ा सवाल है। दोनों पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।

