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सोनिया गांधी की किताब विवाद पर गहलोत का हमला, केंद्र और पीएमओ की चुप्पी पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी की किताब विवाद पर गहलोत का हमला, केंद्र और पीएमओ की चुप्पी पर उठाए सवाल

सोनिया गांधी की आगामी किताब के प्रकाशन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पर निशाना साधा है। गहलोत ने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार प्रकाशक पर दबाव डाले जाने की बात कह रहा है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही है।

गहलोत ने प्रकाशक के फैसले से आगे उठाए सवाल

अशोक गहलोत ने कहा कि इस पूरे मामले को केवल प्रकाशक के पीछे हटने के फैसले तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने सीधे केंद्र सरकार और पीएमओ की भूमिका पर सवाल खड़े किए। गहलोत का कहना है कि अगर सरकार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है तो उसे सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब विपक्ष की ओर से प्रकाशक पर दबाव डालने की बात कही जा रही है, तब सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

पेंगुइन के फैसले पर उठे सवाल

सोनिया गांधी की आत्मकथा के भारत में प्रकाशन को लेकर विवाद उस समय सामने आया, जब पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के फैसले पर सवाल उठे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि किताब के कुछ हिस्सों को लेकर दबाव बनाया गया। वहीं, प्रकाशक ने बाहरी दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फैसला प्रकाशन प्रक्रिया से जुड़ा था।

गहलोत ने सवाल उठाया कि अगर किताब का प्रकाशन दुनिया के अन्य हिस्सों में हो सकता है तो भारत में इसे लेकर अड़चन क्यों आई।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया

गहलोत ने इस विवाद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से भी जोड़ते हुए कहा कि किसी लेखक की किताब को लेकर इस तरह की स्थिति चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि पुस्तक में कुछ मुद्दों से जुड़े अंशों को लेकर आपत्ति जताई गई और बदलाव का दबाव बनाया गया।

हालांकि, प्रकाशक की ओर से इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया है और कंपनी ने कहा है कि उसका निर्णय सामान्य संपादकीय प्रक्रिया का हिस्सा था।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

किताब को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा मामला है, जबकि दूसरी ओर प्रकाशन संस्था ने राजनीतिक दबाव के आरोपों से इनकार किया है।

फिलहाल, इस पूरे विवाद में अशोक गहलोत के बयान के बाद सियासी बहस और तेज हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं।

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