निकाय चुनाव से पहले परिसीमन पर गहलोत का आरोप, बोले- कांग्रेस समर्थित वार्डों को मिलाया, भाजपा इलाकों में बांटा
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनाव प्रक्रिया और परिसीमन को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गहलोत ने दावा किया कि निकाय चुनाव से पहले वार्डों का परिसीमन मनमाने तरीके से किया गया और इसमें राजनीतिक लाभ को ध्यान में रखा गया। उनके मुताबिक कांग्रेस समर्थित इलाकों के तीन-चार वार्डों को मिलाकर एक वार्ड बना दिया गया, जबकि भाजपा समर्थित क्षेत्रों में एक वार्ड को दो या तीन वार्डों में बांट दिया गया।
गहलोत ने कहा कि परिसीमन का असर चुनाव परिणामों पर भी पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद पार्टी के उम्मीदवार अपेक्षाकृत कम वार्ड जीत सके। हालिया चुनावी विश्लेषण में भी जयपुर और जोधपुर जैसे नगर निगमों में वोट और वार्ड जीत के बीच अंतर का उल्लेख किया गया है, हालांकि परिसीमन के प्रभाव को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं मौजूद हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि परिसीमन की प्रक्रिया के दौरान एक ही परिवार के सदस्यों के वोट अलग-अलग वार्डों में चले गए। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में पति-पत्नी और एक ही घर में रहने वाले परिवार के सदस्यों के मतदाता क्षेत्र अलग कर दिए गए। गहलोत ने इसे चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम बताया।
जोधपुर का उदाहरण देते हुए गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस को भाजपा की तुलना में अधिक वोट मिले, लेकिन इसके बावजूद दोनों दलों के वार्डों की संख्या लगभग बराबर रही। चुनावी आंकड़ों के अनुसार जोधपुर में शुरुआती नतीजों में भाजपा और कांग्रेस दोनों को 44-44 वार्ड मिले थे और बाद में एक सीट पर पुनर्मतदान के बाद भाजपा का आंकड़ा 45 हुआ।
गहलोत ने परिसीमन के अलावा चुनावों में सरकारी मशीनरी और धनबल के कथित इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना चाहिए और जनादेश का सम्मान होना जरूरी है।
हालांकि, परिसीमन को लेकर गहलोत और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं। चुनावी विश्लेषणों में परिसीमन के प्रभाव को लेकर आंकड़ों की चर्चा जरूर हुई है, लेकिन इन आंकड़ों की अलग-अलग राजनीतिक व्याख्या की जा रही है।
निकाय चुनाव के बाद परिसीमन और बोर्ड गठन को लेकर राजस्थान में राजनीतिक बहस तेज है। गहलोत के इन आरोपों पर सरकार और भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

