आरपीएमटी-2009 से लेकर नीट तक: 16 साल बाद भी पेपर लीक के सवालों से पीछा नहीं छुड़ा पाया सिस्टम
देशभर में नीट यूजी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर मचे बवाल के बीच राजस्थान का 16 साल पुराना आरपीएमटी-2009 मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उस समय मेडिकल प्रवेश परीक्षा में फर्जीवाड़े और पेपर आउट की आशंका जताई गई थी, लेकिन आज भी उस मामले के कई सवाल अनुत्तरित हैं।
Rajasthan में आयोजित आरपीएमटी-2009 परीक्षा उस दौर के सबसे चर्चित विवादों में शामिल रही थी। आरोप लगे थे कि कुछ अभ्यर्थियों ने गलत तरीकों और कथित पेपर लीक के जरिए मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हासिल किया। हालांकि, समय बीतने के साथ मामला धीरे-धीरे दब गया और उस परीक्षा से जुड़े कई अभ्यर्थी आज डॉक्टर बनकर बड़े पदों पर सेवाएं दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला बताता है कि परीक्षा प्रणाली में छोटी सी गड़बड़ी भी लंबे समय तक असर छोड़ सकती है। जिन लोगों पर उस समय सवाल उठे थे, वे आज चिकित्सा व्यवस्था का हिस्सा हैं और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर कार्यरत हैं।
आरपीएमटी-2009 विवाद के दौरान परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। उस समय भी जांच और कार्रवाई की मांग हुई थी, लेकिन कई लोगों का मानना है कि मामले की पूरी सच्चाई कभी सामने नहीं आ सकी।
अब जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, तब पुराना आरपीएमटी मामला फिर चर्चा में है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते परीक्षा प्रणाली को मजबूत नहीं किया गया, तो युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर होता जाएगा।
प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी होती हैं। ऐसे में पेपर लीक या फर्जीवाड़े की घटनाएं केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं।
राजनीतिक स्तर पर भी पेपर लीक का मुद्दा लगातार गरमाया हुआ है। विपक्ष सरकारों पर लापरवाही के आरोप लगा रहा है, जबकि सरकारें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रही हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कार्रवाई से नहीं, बल्कि तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों से ही व्यवस्था में भरोसा लौटाया जा सकता है।
आरपीएमटी-2009 से लेकर आज के नीट विवाद तक एक बात साफ दिखाई देती है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चुनौतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
फिलहाल, देशभर में परीक्षा सुधार, पारदर्शी व्यवस्था और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानूनों की मांग लगातार तेज होती जा रही है।

