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राजस्थानी बंधेज से केसरिया पगड़ी तक, 13 साल में हर बार खास रहा PM मोदी का साफा

राजस्थानी बंधेज से केसरिया पगड़ी तक, 13 साल में हर बार खास रहा PM मोदी का साफा

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साफा और पगड़ी पहनने का अंदाज हर साल चर्चा का विषय बन जाता है। लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते समय उनका पहनावा भी लोगों का ध्यान खींचता है। खासकर सिर पर सजी रंग-बिरंगी पगड़ियां और साफे राजस्थान समेत देश के अलग-अलग हिस्सों की लोक संस्कृति और परंपराओं की झलक दिखाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधनों के दौरान कई तरह के साफे और पगड़ियां पहनी हैं। कभी राजस्थानी बंधेज की झलक दिखी तो कभी केसरिया, लाल, पीले और बहुरंगी साफे ने लोगों का ध्यान खींचा। हर साल उनके साफे का रंग और डिजाइन अलग नजर आया, जिससे उनके पहनावे में क्षेत्रीय संस्कृति की झलक दिखाई देती रही।

राजस्थानी बंधेज से रहा खास लगाव

प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के परिधानों में राजस्थान की पारंपरिक बंधेज कला कई बार नजर आई है। बंधेज राजस्थान की प्रसिद्ध टाई-डाई परंपरा है, जिसमें कपड़े को बांधकर रंग दिया जाता है। इससे कपड़े पर खास तरह के छोटे-छोटे पैटर्न तैयार होते हैं।राजस्थानी साफे में बंधेज के रंग और डिजाइन इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। प्रधानमंत्री के अलग-अलग स्वतंत्रता दिवस लुक में इस पारंपरिक शैली की झलक देखने को मिलती रही है।

कभी केसरिया, कभी बहुरंगी साफा

प्रधानमंत्री मोदी के साफों में केसरिया रंग भी प्रमुखता से दिखाई देता रहा है। इसके अलावा लाल, पीले, हरे और अन्य रंगों के संयोजन वाले साफे भी उन्होंने पहने हैं।उनके साफों की खासियत केवल रंग नहीं, बल्कि उन्हें पहनने और बांधने का पारंपरिक अंदाज भी रहा है। यही वजह है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद हर बार उनके साफे की तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में आ जाती हैं।

साफे में दिखती है भारत की विविधता

प्रधानमंत्री के सिर पर नजर आने वाली पगड़ी या साफा सिर्फ फैशन का हिस्सा नहीं होता। भारत के अलग-अलग राज्यों में पगड़ी पहनने की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं। राजस्थान का साफा, पंजाब की पगड़ी, गुजरात की पारंपरिक शैली और देश के अन्य हिस्सों की सिर परिधान परंपराएं भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हैं।प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे में भी कई बार इसी विविधता और क्षेत्रीय संस्कृति की झलक देखने को मिली है।

हर साल कैमरों का फोकस रहता है साफे पर

लाल किले से भाषण के दौरान प्रधानमंत्री का साफा कैमरों के लिए भी खास आकर्षण बनता है। भाषण शुरू होने से पहले ही उनके परिधान और साफे की तस्वीरें सामने आने लगती हैं।सोशल मीडिया पर लोग साफे के रंग, डिजाइन और उसके संभावित सांस्कृतिक संदेश को लेकर चर्चा करते हैं। कई बार साफे की शैली को किसी खास क्षेत्र की संस्कृति से जोड़कर भी देखा जाता है।

स्वतंत्रता दिवस की पहचान बना अंदाज

पिछले कई वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस के लुक में बदलाव देखने को मिला है, लेकिन साफा या पगड़ी उनके पहनावे का एक प्रमुख हिस्सा बना रहा है। यही वजह है कि लाल किले से उनके भाषण के साथ-साथ उनका साफा भी स्वतंत्रता दिवस की तस्वीरों का एक चर्चित हिस्सा बन गया है।

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