फसल बीमा योजना में 31 लाख का फर्जीवाड़ा, वीडियो में जाने एक ही खेत पर 7 आवेदन, 4 मंजूर; किसान और बटाईदार ने उठाया क्लेम
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लाखों रुपये के कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि एक ही खेत और एक ही फसल के खराबे के नाम पर कई बार क्लेम के लिए आवेदन किया गया। इनमें से चार आवेदन मंजूर हो गए और कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपये की क्लेम राशि खातों में पहुंच गई।
मामले का खुलासा होने के बाद कृषि विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। विभाग ने फर्जीवाड़े में शामिल किसानों, CSC और ई-मित्र संचालकों के साथ बीमा कंपनी के कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कराने को कहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही खेत की चार अलग-अलग पॉलिसियां क्लेम के स्तर तक कैसे पहुंच गईं।
एक ही खेत पर 7 बार किए गए आवेदन
जांच में सामने आया कि एक ही खसरा नंबर की जमीन पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सात बार अलग-अलग आवेदन किए गए। ये आवेदन अलग-अलग ई-मित्र केंद्रों के माध्यम से किए गए थे। सभी आवेदनों में एक ही खेत और फसल से संबंधित खराबे का दावा किया गया था।
इन सात आवेदनों में से चार आवेदन मंजूर हो गए। इनके आधार पर कुल 31 लाख 15 हजार 514 रुपये की राशि क्लेम के रूप में खातों में पहुंच गई। मामले में यह भी सामने आया कि जमीन बटाई यानी लीज पर दी गई थी, इसके बावजूद जमीन के मालिक और बटाईदार की ओर से एक ही फसल के खराबे को लेकर अलग-अलग दावे किए गए।
किसान और बटाईदार ने अलग-अलग उठाया क्लेम
मामले के मुताबिक, जिस जमीन पर फसल बोई गई थी, उसे बटाई पर दिया गया था। किसान ने एक ही खेत में एक ही फसल के खराबे का तीन बार क्लेम उठा लिया। दूसरी ओर, बटाईदार ने भी उसी फसल के नुकसान को दिखाकर सात लाख रुपये से अधिक का क्लेम हासिल कर लिया।
इस तरह एक ही खेत और फसल के नुकसान को अलग-अलग तरीके से दिखाकर बीमा राशि हासिल करने की कोशिश की गई। मामले की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि आवेदनों में जमीन, किसान और फसल से जुड़ी जानकारी किस तरह दर्ज की गई।
बीमा कंपनी के सिस्टम ने पकड़ा फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि बीमा कंपनी क्षेमा जनरल इंश्योरेंस ने सबसे पहले किए गए आवेदन को अप्रूव कर दिया था। इसका क्लेम सबसे पहले पास हुआ और राशि किसान बनवारी लाल के खाते में पहुंची।
इसके बाद तीन अलग-अलग आवेदन किए गए। इन आवेदनों में पहले आवेदन की तुलना में थोड़ी-थोड़ी जानकारी बदली गई थी। बीमा कंपनी ने अपनी जांच प्रक्रिया के दौरान इन तीनों आवेदनों को रिजेक्ट कर दिया। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के सिस्टम में बाद के आवेदनों में गड़बड़ी पकड़ में आ रही थी।
कृषि विभाग ने बीमा कंपनी पर उठाए सवाल
मामले में कृषि विभाग ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। विभाग यह जांच कर रहा है कि जब एक ही खसरा नंबर पर सात आवेदन किए गए थे तो चार आवेदन क्लेम की मंजूरी तक कैसे पहुंच गए।
अब किसानों के साथ CSC और ई-मित्र संचालकों की भूमिका की भी जांच होगी। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि बीमा कंपनी के स्तर पर सत्यापन में कहां चूक हुई और एक ही खेत की कई पॉलिसियां क्लेम भुगतान तक कैसे पहुंचीं।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 31 लाख रुपये से अधिक की राशि में कितनी रकम गलत तरीके से हासिल की गई और इसकी जिम्मेदारी किस-किस की है। कृषि विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित पक्षों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।

