राजधानी जयपुर में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शास्त्री नगर थाना इलाके में आरटीई (Right to Education) योजना के तहत फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। आरोप है कि एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल ने बिना एडमिशन के ही एक बच्ची के नाम पर सरकारी राशि उठा ली।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित स्कूल ने रिकॉर्ड में बच्ची का प्रवेश दर्शाकर सरकार से आरटीई योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि प्राप्त कर ली, जबकि वास्तविकता में बच्ची ने स्कूल में कभी पढ़ाई ही नहीं की। इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और पुलिस दोनों हरकत में आ गए हैं।
मामले की जानकारी मिलने पर अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी न केवल सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग है, बल्कि जरूरतमंद बच्चों के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ है।
पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। संबंधित स्कूल प्रबंधन और प्रिंसिपल से पूछताछ की जा रही है। साथ ही स्कूल के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस तरह की अनियमितता कितने समय से चल रही थी और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और वसूली गई राशि को वापस लिया जाएगा। इसके अलावा अन्य स्कूलों की भी जांच की जा सकती है, ताकि इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सके।
यह घटना आरटीई जैसी महत्वपूर्ण योजना की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए नियमित ऑडिट और सख्त निगरानी जरूरी है।
कुल मिलाकर, जयपुर में सामने आया यह फर्जीवाड़ा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करता है।

