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पूर्व जस्टिस एसपी शर्मा का बड़ा दावा- जस्टिस संदीप मेहता ने वकीलों को हड़ताल के लिए उकसाया, वीडियो में कहा- प्रोफेशनल जेलेसी का नतीजा

पूर्व जस्टिस एसपी शर्मा का बड़ा दावा- जस्टिस संदीप मेहता ने वकीलों को हड़ताल के लिए उकसाया, वीडियो में कहा- प्रोफेशनल जेलेसी का नतीजा

राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। एक मीडिया इंटरव्यू में जस्टिस शर्मा ने जस्टिस मेहता के आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि दोनों के बीच पेशेवर ईर्ष्या थी और इसी वजह से उनके खिलाफ आरोप लगाए गए।जस्टिस शर्मा ने आरोप लगाया कि जस्टिस संदीप मेहता ने राजस्थान हाईकोर्ट के वकीलों को उनके खिलाफ हड़ताल के लिए उकसाया। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान लंबे समय तक ऐसी कोई हड़ताल नहीं हुई थी और विवाद के बाद ही वकीलों का आंदोलन सामने आया। अगस्त के अंत में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर पीठ के वकीलों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और न्यायिक कार्य के बहिष्कार का ऐलान किया था।

बोले- मुझे जस्टिस मेहता से जिरह का मौका मिलना चाहिए

जस्टिस शर्मा ने कहा कि उन्हें जस्टिस संदीप मेहता से जिरह करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का जवाब दिया जा सके। उन्होंने दावा किया कि जस्टिस मेहता की मुख्य समस्या यह थी कि वे राजस्थान में कार्यरत थे और वह उन्हें यहां नहीं देखना चाहते थे।पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पूरे घटनाक्रम को वह पेशेवर जलन के संदर्भ में देखते हैं। हालांकि, जस्टिस मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर संस्थागत स्तर पर जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आई थी और आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष से पहले जस्टिस शर्मा को जवाब देने का अवसर दिए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।

जस्टिस मेहता ने CJI को लिखे थे कई पत्र

दरअसल, अगस्त 2026 में जस्टिस संदीप मेहता ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को कई पत्र भेजे थे। 2, 10 और 17 अगस्त के पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर शक्तियों के कथित दुरुपयोग और हाईकोर्ट के प्रशासनिक कामकाज से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने दावा किया था कि उन्हें कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे जस्टिस शर्मा की सत्यनिष्ठा को लेकर सवाल उठते हैं। उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट के लिए दूसरे हाईकोर्ट से स्थायी मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने और जस्टिस शर्मा को स्थानांतरित करने का अनुरोध भी किया था।बाद में सामने आए एक और पत्र में जस्टिस मेहता ने न्यायिक जांच में कथित हस्तक्षेप, प्रशासनिक शक्तियों के इस्तेमाल और कुछ मामलों की लिस्टिंग सहित अन्य मुद्दे भी उठाए थे। ये सभी आरोप जस्टिस शर्मा की कार्यप्रणाली से जुड़े थे और उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया था।

विवाद के बीच बदला हाईकोर्ट का नेतृत्व

इस पूरे विवाद के बीच जस्टिस शर्मा ने न्यायिक कार्य से दूरी बनाई और बाद में 26 सितंबर को सेवानिवृत्त हो गए। इसके बाद जस्टिस संजय कुमार अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला।जस्टिस शर्मा का ताजा इंटरव्यू इस विवाद पर उनकी ओर से पहली विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए न्यायपालिका के भीतर ऐसे विवादों के सार्वजनिक होने पर भी सवाल उठाए हैं।

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