पत्नी की सैलरी ATM से जबरन निकालना मानसिक क्रूरता: वीडियो में जाने राजस्थान हाईकोर्ट ने RTI से निजी जानकारी मांगने को भी माना गलत, पति की अपील खारिज
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में पत्नी के सैलरी अकाउंट से एटीएम कार्ड के जरिए जबरन पैसे निकालने, उसके सहकर्मियों के साथ अवैध संबंध होने के आरोप लगाने और RTI के माध्यम से उसकी निजी जानकारी मांगने को मानसिक क्रूरता माना है। अदालत ने पति की अपील खारिज करते हुए अलवर फैमिली कोर्ट-2 की ओर से जारी तलाक की डिक्री को बरकरार रखा है।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि पति की ओर से पत्नी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का फैमिली कोर्ट में तथ्यों के साथ खंडन किया गया था। वहीं, पत्नी की मेडिकल और सैलरी से संबंधित निजी जानकारी हासिल करने के लिए पति की ओर से RTI लगाने के तथ्य भी रिकॉर्ड में मौजूद थे।
पत्नी की निजी जानकारी के लिए लगाई थी RTI
मामले में अदालत के सामने यह तथ्य आया कि पति ने पत्नी की मेडिकल और वेतन से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए सूचना के अधिकार (RTI) का इस्तेमाल किया था। अदालत ने इसे वैवाहिक रिश्ते में पत्नी की निजता और सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला माना।इसके अलावा पति पर पत्नी के सैलरी अकाउंट से उसके एटीएम कार्ड के जरिए जबरन पैसे निकालने और उसके सहकर्मियों के साथ अवैध संबंध होने के आरोप लगाने की बात भी सामने आई। हाईकोर्ट ने इन परिस्थितियों को मानसिक क्रूरता के दायरे में माना।
2018 से अलग रह रहे हैं पति-पत्नी
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि पति-पत्नी साल 2018 से अलग-अलग रह रहे हैं। दोनों के बीच लंबे समय से वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं रहे हैं। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए माना कि अब उनके दोबारा साथ रहने और दाम्पत्य संबंध बहाल होने की कोई संभावना नहीं बची है।इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने पति की अपील को खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट की ओर से दी गई तलाक की डिक्री को बरकरार रखा।
2010 में हुई थी शादी, दो बेटियां हैं
पत्नी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शोवित झांझड़िया ने अदालत को बताया कि दोनों की शादी 6 फरवरी 2010 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। इस शादी से उनकी दो बेटियां हैं, जो फिलहाल अपनी मां के साथ रह रही हैं।पत्नी की ओर से अदालत में पति के व्यवहार और लगाए गए आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा गया था। फैमिली कोर्ट ने उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तलाक की डिक्री जारी की थी।
फैमिली कोर्ट का फैसला हाईकोर्ट में बरकरार
पति ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, खंडपीठ ने मामले के रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अपील खारिज कर दी।इस फैसले के साथ ही अलवर फैमिली कोर्ट-2 की ओर से जारी तलाक की डिक्री बरकरार रहेगी। अदालत के फैसले में यह स्पष्ट हुआ कि वैवाहिक जीवन में आर्थिक दबाव, निराधार आरोप और निजी जानकारी हासिल करने के लिए RTI का इस्तेमाल जैसे व्यवहार परिस्थितियों के आधार पर मानसिक क्रूरता माने जा सकते हैं।

