राजस्थान में जनगणना-2027 का पहला चरण: मकान सूचीकरण 1 मई से 14 जून तक, पहली बार सेल्फ सेंसस का विकल्प
राजस्थान सरकार ने जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए मकान सूचीकरण की तारीखें तय कर दी हैं। राज्य सरकार ने गुरुवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की। इस बार जनगणना में पहली बार सेल्फ सेंसस (स्व-गणना) का विकल्प भी जनता के लिए उपलब्ध कराया गया है।
मकान सूचीकरण का यह चरण 1 मई से 14 जून तक चलेगा। इसमें नागरिकों को 1 मई से 15 मई तक अपने घरों की जानकारी खुद दर्ज करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद 16 मई से 14 जून के बीच सरकारी प्रगणक फील्ड में जाकर प्रत्येक मकान का डेटा जुटाएंगे।
राज्य सरकार ने बताया कि मकान सूचीकरण के दौरान प्रत्येक घर के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जाएगी, जैसे कि परिवार की संरचना, निवासी सदस्य, बुनियादी सुविधाएँ और अन्य आवश्यक विवरण। यह जानकारी आगे चलकर जनगणना-2027 के मुख्य आंकड़े तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सेल्फ सेंसस के माध्यम से लोग घर बैठे अपने विवरण ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए विशेष पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि इससे न केवल डेटा एकत्रीकरण तेज होगा, बल्कि लोगों को आसान और पारदर्शी प्रक्रिया का अनुभव भी मिलेगा।
राजस्थान में पहली बार सेल्फ सेंसस के विकल्प को लागू किया जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना और जनगणना की प्रक्रिया को और सुलभ और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाना है। अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि इससे जनगणना के परिणाम सटीक और विश्वसनीय होंगे।
जनगणना अधिकारी ने कहा, “सेल्फ सेंसस के जरिए लोग घर बैठे अपने परिवार और मकान की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी को ऑनलाइन सुविधा का उपयोग करने में कठिनाई हो, तो प्रगणक फील्ड में जाकर जानकारी जुटाएंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी।”
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और अपनी जानकारी समय पर और सही तरीके से दर्ज करें। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग सेल्फ सेंसस नहीं कर पाएंगे, उनके लिए प्रगणक फील्ड में जाकर डेटा जुटाने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
राज्य में मकान सूचीकरण की यह प्रक्रिया शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लागू होगी। इससे सरकार को हर जिले, तहसील और ग्राम के स्तर पर विस्तृत और सटीक डेटा प्राप्त होगा। इस डेटा का उपयोग बुनियादी सेवाओं, योजना क्रियान्वयन और नीति निर्माण में किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेल्फ सेंसस जैसी तकनीकी पहल से जनता की भागीदारी बढ़ती है और जनगणना की विश्वसनीयता मजबूत होती है। इसके अलावा, समय की बचत और प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होती है।
राजस्थान में जनगणना-2027 का मकान सूचीकरण चरण न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों और राज्य सरकार के बीच सहयोग और भागीदारी का भी प्रतीक है।

