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किसान रामूराम महला ने शादी के कार्ड की परंपरा बदली, कपड़े के थैलों पर निमंत्रण छपवाकर दी नई सीख

किसान रामूराम महला ने शादी के कार्ड की परंपरा बदली, कपड़े के थैलों पर निमंत्रण छपवाकर दी नई सीख

राजस्थान के कुचामन सिटी से एक प्रेरक और पर्यावरण-संवेदनशील पहल सामने आई है। आमतौर पर शादी-ब्याह के कागज़ के कार्ड कुछ दिनों बाद रद्दी या कूड़े के ढेर में चले जाते हैं। लेकिन यहाँ के किसान रामूराम महला ने इस परंपरा को पूरी तरह बदलकर समाज के सामने नई मिसाल पेश की है।

रामूराम महला ने अपने बच्चों की शादी के निमंत्रण के लिए कागज़ के कार्ड की बजाय कपड़े के थैले पर निमंत्रण छपवाया। उन्होंने बताया कि इसका मकसद पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ नवीनता और स्थायित्व को बढ़ावा देना था। कपड़े के थैले न केवल लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं, बल्कि इन्हें कूड़े में फेंका नहीं जाता, जिससे कचरा कम होता है।

स्थानीय लोगों ने इस पहल की बहुत सराहना की है। कई लोग इसे पर्यावरण-संवेदनशील और नवाचारपूर्ण कदम बता रहे हैं। बच्चों की शादी में आए मेहमानों ने भी इस विचार को प्रशंसनीय और उदाहरणीय कहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे छोटे-छोटे कदम पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने में मदद करते हैं। आज के समय में कागज़ का अत्यधिक उपयोग पेड़ों की कटाई और कचरे के बढ़ने का कारण बनता है। ऐसे पहल न केवल स्थानीय समाज में जागरूकता पैदा करते हैं बल्कि अन्य जिलों और राज्यों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनते हैं।

रामूराम महला की यह पहल दर्शाती है कि सामाजिक परंपरा और पर्यावरण सुरक्षा को साथ लेकर चलना संभव है। कपड़े के थैले पर छपे निमंत्रण ने शादी के समारोह में न केवल अभिनवता जोड़ी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

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