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जालोर के किसान परिवार ने 300 बीघा जमीन खेजड़ी संरक्षण के लिए समर्पित की, बीकानेर के महापड़ाव के बीच मिसाल कायम

जालोर के किसान परिवार ने 300 बीघा जमीन खेजड़ी संरक्षण के लिए समर्पित की, बीकानेर के महापड़ाव के बीच मिसाल कायम

राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण को लेकर अलग-अलग पहलें जोर पकड़ रही हैं। जहां बीकानेर में पर्यावरण प्रेमी खेजड़ी के संरक्षण के लिए पिछले पांच दिनों से अनशन पर बैठे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर जालोर जिले के सायला क्षेत्र के हरमू गांव के एक किसान परिवार ने अपनी 300 बीघा बेशकीमती और उपजाऊ जमीन राजस्थान के राजकीय वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया है।

इस परिवार ने बताया कि उनका मकसद न केवल अपने खेतों की सुरक्षा करना है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए खेजड़ी के महत्व को बनाए रखना भी है। उन्होंने कहा कि खेजड़ी सिर्फ पेड़ नहीं, बल्कि मरुस्थलीय जीवन और पर्यावरण का आधार है। यह भूमि अब पूरी तरह से खेजड़ी संरक्षण के लिए सुरक्षित रहेगी और भविष्य में किसी भी विकास या अतिक्रमण से मुक्त रहेगी।

जालोर के इस कदम की मिसाल पूरे प्रदेश में दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे उदाहरण पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने परिवार की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल अन्य किसानों और ग्रामीण समुदायों को भी प्रेरित कर सकती है।

बीकानेर में चल रहे महापड़ाव के दौरान आंदोलनकारियों ने भी इस कदम की प्रशंसा की। उनका कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि पूरे राजस्थान में खेजड़ी संरक्षण को लेकर सख्त कानून (ट्री एक्ट) लागू किया जाए।

इस पहल से यह स्पष्ट हुआ कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता केवल आंदोलन और अनशन तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर स्थायी संरक्षण के प्रयास भी महत्वपूर्ण हैं। जालोर के इस किसान परिवार ने साबित कर दिया कि जमीन और पेड़ दोनों का संरक्षण साथ-साथ संभव है।

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