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खारे पानी वाले गांव में किसान ने बदली खेती की तस्वीर, यूट्यूब से सीखा और आठ बीघा में उगाई नई उम्मीद

खारे पानी वाले गांव में किसान ने बदली खेती की तस्वीर, यूट्यूब से सीखा और आठ बीघा में उगाई नई उम्मीद

जिले के किशनगढ़ रेनवाल ब्लॉक का खेड़ी मिलक गांव लंबे समय से भूजल संकट से जूझ रहा है। गांव डार्क जोन में शामिल है, जहां पानी की उपलब्धता बेहद कम है या फिर जो पानी मिलता है वह खारा होने के कारण खेती के लिए उपयोगी नहीं रहता। ऐसे हालात में यहां के युवा किसान कानाराम यादव ने अपनी मेहनत और नई सोच से खेती का तरीका बदल दिया है।

कानाराम यादव पहले पूरी तरह बरसाती खेती पर निर्भर थे। उनकी आठ बीघा जमीन पर बारिश के भरोसे ही फसल होती थी। ज्यादातर वे बाजरे की खेती ही कर पाते थे, क्योंकि पानी की कमी के कारण दूसरी फसलों का उत्पादन संभव नहीं था। सीमित आमदनी और प्राकृतिक चुनौतियों के बीच भी उन्होंने खेती में बदलाव का रास्ता तलाशना शुरू किया।

इंटरनेट को बनाया खेती का साथी

कानाराम ने बताया कि उन्होंने इंटरनेट और यूट्यूब के माध्यम से कम पानी में होने वाली फसलों, आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। धीरे-धीरे उन्हें पता चला कि कम पानी वाले क्षेत्रों में भी कई ऐसी फसलें ली जा सकती हैं, जिनसे किसानों की आय बढ़ सकती है।

उन्होंने सरकारी योजनाओं और कृषि विभाग की जानकारियों को समझा और अपनी खेती में नए प्रयोग शुरू किए। परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने ऐसी फसलों को अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया, जिनमें पानी की जरूरत कम होती है और बाजार में मांग भी अच्छी रहती है।

मुश्किल हालात में भी नहीं छोड़ी उम्मीद

खेड़ी मिलक जैसे गांवों में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिंचाई के पानी की है। भूजल स्तर गिरने और पानी खारा होने के कारण किसान चाहकर भी ज्यादा विकल्प नहीं अपना पाते। ऐसे में कानाराम ने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की कोशिश की।

उन्होंने खेती से जुड़ी नई जानकारियां हासिल कीं और उन्हें अपने खेत में लागू किया। इससे उन्हें खेती के प्रति नया भरोसा मिला। उनका मानना है कि किसान अगर नई तकनीक और सही जानकारी को अपनाएं तो कम पानी वाले क्षेत्रों में भी बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

कानाराम यादव की कहानी उन किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो पानी की कमी के कारण खेती छोड़ने का मन बना लेते हैं। उन्होंने साबित किया कि आधुनिक जानकारी और मेहनत के दम पर सीमित संसाधनों में भी खेती को लाभ का जरिया बनाया जा सकता है।

आज जब किसान जल संकट, मौसम बदलाव और बढ़ती लागत जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब कानाराम जैसे युवा किसान तकनीक और नवाचार के सहारे खेती को नई दिशा दे रहे हैं। उनका प्रयास दिखाता है कि सही जानकारी और इच्छाशक्ति के साथ मुश्किल परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है।

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