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10 लाख में बनवाया फर्जी FMG सर्टिफिकेट, वीडियो में जाने SOG ने दिल्ली से MBBS डॉक्टर को किया गिरफ्तार; करौली मेडिकल कॉलेज में की थी इंटर्नशिप

10 लाख में बनवाया फर्जी FMG सर्टिफिकेट, वीडियो में जाने SOG ने दिल्ली से MBBS डॉक्टर को किया गिरफ्तार; करौली मेडिकल कॉलेज में की थी इंटर्नशिप

राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने फर्जी FMG (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट) सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल इंटर्नशिप करने वाले एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान नितिन कुमार, निवासी शाहदरा (दिल्ली) के रूप में हुई है। SOG के अनुसार, आरोपी ने 10 लाख रुपए देकर फर्जी FMG सर्टिफिकेट बनवाया था और उसी के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप पूरी की। फिलहाल SOG आरोपी से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।

कजाकिस्तान से किया था MBBS

SOG के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल ने बताया कि नितिन कुमार ने कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी और वर्ष 2022 में भारत लौटा था।भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए उसे नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित FMG स्क्रीनिंग परीक्षा पास करनी थी, लेकिन वह कई प्रयासों के बावजूद परीक्षा में सफल नहीं हो सका।

10 लाख रुपए देकर बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट

जांच में सामने आया कि परीक्षा पास नहीं होने के बाद आरोपी ने दौसा निवासी शुभम गुर्जर के संपर्क में आकर 10 लाख रुपए में फर्जी FMG सर्टिफिकेट तैयार कराया।SOG के अनुसार, इसी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नितिन कुमार ने राजकीय मेडिकल कॉलेज, करौली में इंटर्नशिप के लिए आवेदन किया और मेडिकल इंटर्नशिप पूरी कर ली।

पहले गिरफ्तार हो चुका है शुभम गुर्जर

इस मामले में SOG पहले ही शुभम गुर्जर को गिरफ्तार कर चुकी है। पूछताछ के दौरान शुभम ने नितिन कुमार का नाम उजागर किया था।इसके बाद SOG की टीम ने दिल्ली में दबिश देकर नितिन कुमार को गिरफ्तार कर लिया। अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

बड़े रैकेट की जांच में जुटी SOG

प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि फर्जी FMG सर्टिफिकेट तैयार कराने का यह मामला किसी बड़े गिरोह से जुड़ा हो सकता है। SOG यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी तरीके से अन्य विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स को भी फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए गए।जांच एजेंसी मेडिकल कॉलेजों में जमा कराए गए दस्तावेजों और संबंधित रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही है।

पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद

SOG अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर इस फर्जीवाड़े से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं, तो इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।यह मामला मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

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