एक बड़े फर्जीवाड़े के मामले में जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं, जहां फर्जी तरीके से आधार कार्ड तैयार किए जाने का मामला सामने आया है। अब तक इस तरह कितने फर्जी आधार बनाए गए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही है। इसके लिए UIDAI और Department of Information Technology से समन्वय स्थापित कर डेटा खंगाला जा रहा है।
जांच अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि एक संगठित गिरोह इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहा था। यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध तरीके से आधार कार्ड तैयार कर रहा था, जिससे पहचान संबंधी धोखाधड़ी की आशंका बढ़ गई है।
अब तक की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने फर्जी आधार कार्ड बनाए गए और इनका उपयोग किन-किन गतिविधियों में किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल कुछ व्यक्तियों का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।
जांच एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों की भी पहचान करने में जुटी हैं। तकनीकी और डिजिटल रिकॉर्ड्स की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन शामिल था और किस स्तर पर यह पूरा खेल चल रहा था।
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में दस्तावेजों की सत्यता, आधार पंजीकरण प्रक्रिया और संबंधित केंद्रों की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी तकनीकी या प्रशासनिक चूक का फायदा उठाया गया।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों से राष्ट्रीय पहचान प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है, इसलिए जांच को गंभीरता से लिया जा रहा है। दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
फिलहाल जांच जारी है और UIDAI तथा संबंधित विभागों के सहयोग से पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं। आने वाले दिनों में इस फर्जी आधार कार्ड रैकेट को लेकर और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

