Samachar Nama
×

बहुमत के बाद भी कांग्रेस सतर्क, 42 पार्षदों और 3 निर्दलीयों को साथ लेकर चली; जोड़-तोड़ से बचने की तैयारी

बहुमत के बाद भी कांग्रेस सतर्क, 42 पार्षदों और 3 निर्दलीयों को साथ लेकर चली; जोड़-तोड़ से बचने की तैयारी

नगर निगम चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है, लेकिन पार्टी किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नजर नहीं आ रही। बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस ने अपने सभी विजयी पार्षदों को एकजुट रखने की रणनीति अपनाई है। इसके साथ ही तीन निर्दलीय पार्षदों को भी अपने साथ शामिल किया गया है।

चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक दलों में पार्षदों को अपने पक्ष में बनाए रखने की कवायद तेज हो जाती है। ऐसे में कांग्रेस ने संभावित जोड़-तोड़ की राजनीति को देखते हुए पहले ही सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। पार्टी ने शाम को अपने सभी 42 जीते हुए पार्षदों को एक साथ रखा। इनके अलावा तीन निर्दलीय पार्षद भी कांग्रेस के साथ मौजूद रहे। इस तरह कांग्रेस खेमे में कुल 45 पार्षदों की मौजूदगी रही।

कांग्रेस के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद बोर्ड गठन की प्रक्रिया में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद किसी पार्षद के पाला बदलने या विरोधी खेमे के संपर्क में आने की आशंका से बचने के लिए पार्टी अपने पार्षदों को एकजुट रखना चाहती है।

नगर निगम में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा हासिल करना जरूरी होता है। कांग्रेस के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या होने के कारण उसे किसी बाहरी समर्थन की आवश्यकता नहीं है। इसके बावजूद तीन निर्दलीय पार्षदों का साथ आना पार्टी के लिए अतिरिक्त मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को नगर निगम की सत्ता को लेकर चल रही संभावित जोड़-तोड़ की कोशिशों से जोड़कर देखा जा रहा है। चुनाव परिणामों के बाद विपक्षी दल भी सक्रिय हो जाते हैं और ऐसे पार्षदों पर नजर रखते हैं जिनके समर्थन से बोर्ड गठन के समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस इसी संभावना को देखते हुए अपने पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दे रही है।

पार्षदों को एक साथ रखने के साथ पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें संगठन के प्रति एकजुट रहने का संदेश भी दिया जा रहा है। कांग्रेस का उद्देश्य है कि बोर्ड गठन के समय उसके पास मौजूद बहुमत में किसी तरह की सेंध न लगे और महापौर के चुनाव से लेकर बोर्ड के गठन तक सभी पार्षद पार्टी के साथ बने रहें।

वहीं तीन निर्दलीय पार्षदों के कांग्रेस के साथ आने से पार्टी की स्थिति और मजबूत हुई है। हालांकि निर्दलीयों का भविष्य में किस तरह का राजनीतिक रुख रहता है, इस पर भी निगाह रहेगी। स्थानीय निकायों में निर्दलीय पार्षद कई बार सत्ता पक्ष के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अब सभी की नजर बोर्ड गठन की आगामी प्रक्रिया पर है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने बहुमत को सुरक्षित रखना और संगठन में एकजुटता बनाए रखना है। दूसरी ओर विपक्षी दलों की कोशिश इस समीकरण में सेंध लगाने की हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में नगर निगम की राजनीति में बैठकों, बातचीत और रणनीतिक गतिविधियों का दौर और तेज होने की संभावना है।

Share this story

Tags