यमुना जल परियोजना पर डोटासरा का हमला: 'वीडियो में जाने शेखावाटी को झूठे MOU नहीं, अपने हिस्से का पूरा पानी चाहिए'
शेखावाटी क्षेत्र को यमुना का पानी उपलब्ध कराने की प्रस्तावित परियोजना को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने राजस्थान और हरियाणा के बीच होने वाले नए समझौते (एमओयू/एमओए) पर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार पर राजस्थान के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया है।
नए समझौते पर उठाए सवाल
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि शेखावाटी क्षेत्र के लोगों को केवल समझौतों और घोषणाओं की नहीं, बल्कि उनके हिस्से का पूरा पानी मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार पिछले ढाई साल से केवल एमओयू करने और उसकी घोषणा करने तक ही सीमित है, जबकि धरातल पर कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही।
हरियाणा में पानी लीकेज की जताई आशंका
डोटासरा ने पाइपलाइन के जरिए यमुना जल राजस्थान तक पहुंचाने की योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि पानी हरियाणा से पाइपलाइन के माध्यम से लाया जाएगा तो रास्ते में पड़ने वाले गांवों में पानी के रिसाव और उपयोग की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में राजस्थान को उसके हिस्से का पूरा पानी मिलने को लेकर स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर सरकार को घेरा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि "शेखावाटी की जनता को झूठे एमओयू नहीं, अपने हिस्से का पूरा पानी चाहिए। राजस्थान के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यमुना जल परियोजना को लेकर आखिर कितनी बार एमओयू किया जाएगा और अब तक हुए समझौतों का परिणाम क्या निकला।
17 जून 2024 के समझौते पर भी उठाए सवाल
डोटासरा ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जिस 17 जून 2024 के एमओयू का लगातार उल्लेख करते रहे, वह अब तक केवल कागजों और भाषणों तक ही सीमित दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता को भ्रमित करने का काम किया है।
सरकार ने बताया ऐतिहासिक कदम
वहीं राज्य सरकार का दावा है कि यमुना जल परियोजना शेखावाटी क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक साबित होगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हाल ही में कहा था कि परियोजना के लिए समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है और जल्द ही एमओए पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे योजना को गति मिलेगी।
शेखावाटी में पानी को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
यमुना जल परियोजना को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे क्षेत्र के विकास और जल संकट के समाधान की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष परियोजना की प्रक्रिया और समझौतों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजस्थान की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

