करौली में अवैध पार्किंग वसूली पर जिला उपभोक्ता आयोग का मिसाल कायम करने वाला फैसला
राजस्थान के करौली जिले में अवैध पार्किंग वसूली को लेकर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक बड़ा और मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। आयोग ने राजकीय सामान्य चिकित्सालय करौली के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को इस मामले में जिम्मेदार ठहराते हुए उपभोक्ता कल्याण कोष में 10 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया है।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला अस्पताल के परिसर में पार्किंग शुल्क के अवैध वसूली के कारण सामने आया। मरीज और उनके परिजन शिकायत करते रहे कि बिना किसी वैध आधार के उन्हें पार्किंग शुल्क देना पड़ रहा है। शिकायतों के आधार पर मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा और विस्तृत जांच के बाद आयोग ने आदेश जारी किया।
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि अस्पताल परिसर में अवैध वसूली और नियमों के उल्लंघन को गंभीर अपराध माना जाता है। आयोग ने यह भी कहा कि इस प्रकार की वसूली न केवल जनता का विश्वास तोड़ती है, बल्कि सरकारी संस्थानों की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचाती है।
आयोग ने आदेश में उल्लेख किया कि राजकीय सामान्य चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी को यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी अवैध शुल्क वसूली न हो। उनकी लापरवाही के कारण यह मामला उत्पन्न हुआ और जनता को आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ा। इसलिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हुए उपभोक्ता कल्याण कोष में 10 लाख रुपये जमा कराने का आदेश दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि करौली उपभोक्ता आयोग का यह निर्णय अन्य सरकारी संस्थाओं के लिए भी चेतावनी के रूप में काम करेगा। यह मिसाल स्थापित करता है कि जनता के अधिकारों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकारी अधिकारियों को पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।
स्थानीय नागरिक और मरीज इस फैसले से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से वे अवैध शुल्क और अनियमितताओं से परेशान थे। आयोग के इस फैसले के बाद उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
इस निर्णय से यह भी स्पष्ट होता है कि उपभोक्ता आयोग केवल उपभोक्ताओं की शिकायत सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक संस्थाओं में अनुशासन और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए यह उदाहरण बनेगा कि जनता के अधिकारों का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला राजस्थान में उपभोक्ता अधिकारों और सरकारी पारदर्शिता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। सरकारी संस्थानों में सुधार और जनता की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कदम आवश्यक हैं।
इस प्रकार, करौली जिले में अवैध पार्किंग वसूली के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का यह मिसाल कायम करने वाला फैसला न केवल प्रभावित जनता के लिए राहत का स्रोत है, बल्कि पूरे राज्य में सरकारी जवाबदेही और उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने का प्रतीक भी बन गया है।

