नर्सरी क्षेत्र में पंप हाउस निर्माण पर विवाद, जमीन पर माफिया का दावा; मामला हाईकोर्ट पहुंचा
शहर के नर्सरी क्षेत्र में प्रस्तावित पंप हाउस निर्माण परियोजना अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। करीब 12.19 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर जमीन को लेकर माफिया द्वारा दावा ठोकने से मामला पेचीदा हो गया है। विवाद बढ़ने के बाद यह मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां नगर परिषद अपने पक्ष को मजबूती से रखने की तैयारी कर रही है।
यह पंप हाउस लगभग तीन बीघा जमीन पर प्रस्तावित था, जिसका उद्देश्य शहर के करीब 50 हजार लोगों को बेहतर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना था। लंबे समय से इस क्षेत्र में पानी की समस्या बनी हुई है और इस प्रोजेक्ट को स्थानीय लोगों के लिए राहत की बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा था। लेकिन अब जमीन पर स्वामित्व को लेकर उठे विवाद ने इस योजना की गति पर ब्रेक लगा दिया है।
जानकारी के अनुसार, जिस जमीन पर पंप हाउस का निर्माण होना था, उस पर कुछ लोगों ने अपना दावा पेश करते हुए इसे निजी संपत्ति बताया है। वहीं, नगर परिषद का कहना है कि यह भूमि सरकारी रिकॉर्ड में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज है और इस पर नगर परिषद का पूरा अधिकार है। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है।
नगर परिषद के अधिकारियों का कहना है कि वे हाईकोर्ट में सभी आवश्यक दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश कर रहे हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि जमीन सरकारी है और पंप हाउस निर्माण में कोई कानूनी बाधा नहीं है। परिषद की ओर से स्टे हटवाने की भी कोशिश की जा रही है, ताकि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो सके।
दूसरी ओर, जमीन पर दावा करने वाले पक्ष ने कोर्ट में याचिका दायर कर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक जमीन के स्वामित्व का मामला पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए।
इस विवाद के चलते पंप हाउस निर्माण कार्य फिलहाल अधर में लटक गया है। परियोजना में देरी से सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को हो रहा है, जो पहले से ही जल संकट से जूझ रही है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर नाराजगी भी देखी जा रही है कि एक जरूरी जनहित परियोजना कानूनी विवाद में फंस गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला जल्द सुलझ जाता है, तो न केवल पंप हाउस का निर्माण शुरू हो सकेगा, बल्कि शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था में भी बड़ा सुधार आएगा। वहीं, अगर विवाद लंबा खिंचता है, तो परियोजना की लागत बढ़ने और समयसीमा प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
फिलहाल सबकी नजर हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी है। यह निर्णय तय करेगा कि नर्सरी क्षेत्र में पंप हाउस निर्माण का रास्ता साफ होगा या परियोजना को और इंतजार करना पड़ेगा।

