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बारां सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के बीच विवाद, जान से मारने की धमकी का आरोप; मामला थाने तक पहुंचा

बारां सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों के बीच विवाद, जान से मारने की धमकी का आरोप; मामला थाने तक पहुंचा

बारां जिले के सरकारी अस्पताल में दो वरिष्ठ डॉक्टरों के बीच हुए विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। आपसी झगड़े का मामला थाने तक पहुंच गया है और अस्पताल प्रशासन के साथ-साथ पुलिस भी इसकी जांच में जुट गई है। यह घटना रविवार, 11 जनवरी की बताई जा रही है, जब अस्पताल परिसर में पीडियाट्रिशियन डॉ. गिरिराज और एमसीएच विंग के प्रभारी डॉ. रवि प्रकाश के बीच कहासुनी हुई, जो बाद में झगड़े में बदल गई।

पीडियाट्रिशियन डॉ. गिरिराज ने आरोप लगाया है कि डॉ. रवि प्रकाश ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही उन्होंने अस्पताल के पीएमओ और मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल को भी लिखित शिकायत दी है। डॉ. गिरिराज ने शिकायत में कहा है कि इस तरह के तनावपूर्ण और असुरक्षित माहौल में उनके लिए काम करना संभव नहीं है।

डॉ. गिरिराज का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस तरह का व्यवहार न केवल कर्मचारियों के लिए, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए भी चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन से मामले में निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।

इस पूरे विवाद का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दोनों डॉक्टरों के बीच तीखी बहस और झगड़े के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में अन्य डॉक्टर और स्टाफ बीच-बचाव करते नजर आ रहे हैं। वायरल वीडियो के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

मामले को लेकर एडिशनल एसपी राजेश चौधरी ने बताया कि डॉक्टर की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बयान लिए जाएंगे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, एमसीएच विंग के प्रभारी डॉ. रवि प्रकाश ने डॉ. गिरिराज द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्होंने किसी भी तरह की धमकी नहीं दी है। डॉ. रवि प्रकाश का कहना है कि मामला गलतफहमी और आपसी मतभेद का है, जिसे बेवजह तूल दिया जा रहा है।

इस घटना के बाद अस्पताल के अन्य डॉक्टरों और कर्मचारियों में भी असहजता का माहौल है। स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही संसाधनों और स्टाफ की कमी जैसी चुनौतियां हैं, ऐसे में आपसी विवाद मरीजों की देखभाल पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं।

फिलहाल अस्पताल प्रशासन और पुलिस दोनों स्तर पर मामले की जांच जारी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि विवाद की असल वजह क्या थी और आरोपों में कितनी सच्चाई है। वहीं, वायरल वीडियो ने इस पूरे मामले को सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।

यह मामला न सिर्फ अस्पताल की आंतरिक व्यवस्था, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य वातावरण को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें जांच के नतीजों और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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