जयपुर के लक्खी मेले में शीतलाष्टमी पर आस्था का सैलाब, भक्तों ने चढ़ीं 151 सीढ़ियां
राजधानी जयपुर के शहर चाकसू स्थित शील की डूंगरी पर शीतलाष्टमी के अवसर पर चल रहे प्रसिद्ध लक्खी मेले में इस बार भक्तों का आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। दूर-दराज से आए लाखों श्रद्धालु माता शीतला के दर्शन के लिए 151 सीढ़ियां चढ़कर दर्शन कर रहे हैं।
मंदिर परिसर में सुबह-सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गई हैं। भक्ति और श्रद्धा का यह माहौल पूरे मेले को खास बना रहा है। श्रद्धालुओं का कहना है कि यह अवसर उनके लिए आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक है और माता शीतला की कृपा पाने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं।
मेला प्रशासन ने बताया कि भक्तों की सुरक्षा और सुविधा के लिए प्रत्येक सीढ़ी और मार्ग पर व्यवस्था की गई है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा गार्ड और स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, श्रद्धालुओं के लिए पानी, प्राथमिक चिकित्सा और मार्गदर्शन की व्यवस्था भी की गई है।
मेला केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां विभिन्न तरह के स्थानीय व्यापारी और कलाकार अपने स्टॉल लगाते हैं, जिससे मेले का सांस्कृतिक स्वरूप भी जीवंत दिखाई देता है। भक्तों के साथ ही पर्यटक और स्थानीय लोग भी इस मेले में भाग लेते हैं, जो इसे समाज और संस्कृति का मिलन स्थल बनाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शीतलाष्टमी और लक्खी मेला राजस्थान में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लाखों लोग इस अवसर पर जयपुर और आसपास के जिलों से आते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है।
मेला प्रशासन ने भक्तों से अपील की है कि वे सुरक्षा नियमों का पालन करें और भीड़-भाड़ में धैर्य बनाए रखें। इसके साथ ही पर्यावरण और साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि धार्मिक और सामाजिक अनुभव दोनों सुरक्षित और सुखद रहें।
शीतलाष्टमी के अवसर पर लक्खी मेले में दर्शन करने आए भक्तों ने बताया कि माता शीतला के प्रति उनकी आस्था इतनी प्रगाढ़ है कि किसी भी कठिनाई के बावजूद वे दर्शन के लिए सीढ़ियां चढ़ने से नहीं डरते। बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है, ताकि सभी श्रद्धालु आराम से माता के दर्शन कर सकें।
राजस्थान के धार्मिक आयोजनों में लक्खी मेला अपनी विशेष पहचान रखता है। इस मेले में न केवल भक्ति का माहौल देखने को मिलता है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, खान-पान और हस्तशिल्प का आनंद भी लिया जा सकता है।
इस बार भी लाखों श्रद्धालु, स्थानीय लोग और पर्यटक मिलकर इस मेले को सफल बना रहे हैं। भक्तों का उत्साह और श्रद्धा का माहौल यह दर्शाता है कि शीतलाष्टमी और लक्खी मेला राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का जीवंत प्रतीक है।

