राजस्थान विधानसभा में गरमाई बहस: 100 करोड़ के बजट में सिर्फ 2.83 लाख खर्च, विपक्ष का हमला
राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला, यह दावा करते हुए कि महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट परियोजना के लिए वर्ष **2024‑25 में घोषित 100 करोड़ रुपये के बजट में मात्र 2 लाख 83 हज़ार रुपये ही खर्च किए गए हैं। यह विरोध के बाद सियासी माहौल गरमा गया।
जुर्माना बजट और धरातल पर खर्च का सवाल
टीकाराम जूली ने विधानसभा में कहा कि सरकार ने महाराणा प्रताप के नाम से बड़े बजट की घोषणा तो की, लेकिन दो वर्षों में वास्तविक खर्च बेहद कम है। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या यह महान ऐतिहासिक विरासत को संजोने का काम है या केवल राजनीतिक नारा? जूली ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार तैयारी और कार्यान्वयन में स्पष्ट रूप से विफल रही है।
जूली के अनुसार, महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट योजना के लिए पिछले बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, लेकिन रिपोर्ट में स्पष्ट है कि फरवरी 2026 तक केवल ₹2 लाख 83 हज़ार का ही खर्च रिकॉर्ड में दिखा। इससे यह सवाल उठता है कि योजना की प्रक्रियात्मक शुरुआत या धरातल पर काम कितना हुआ है, यह आंकड़ा स्पष्ट नहीं है।
सरकार का पक्ष और डीपीआर का हवाला
विपक्षी आरोप पर राज्य सरकार की ओर से डिप्टी मुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने जवाब दिया कि महाराणा प्रताप सर्किट परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है और इसके लिए सही तैयारी व योजना अवश्य करनी है ताकि विकास कार्य बड़े पैमाने पर शुरू हो सके। उन्होंने बताया कि अब इस योजना का बजट 275.68 करोड़ रुपये तक बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू हुई है ताकि परियोजना को प्रभावी रूप से लागू किया जा सके।
कुमारी ने विपक्षी आरोपों का पलटवार करते हुए कहा कि पूर्व सरकारों की तुलना में अब योजनाओं को दीर्घकालिक दृष्टि से विकसित किया जा रहा है, और बजट खर्च के आंकड़ों को कागजों तक सीमित रखकर आलोचना करना सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डीपीआर तैयार कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए समय और संसाधनों का समुचित उपयोग किया जाएगा।
सभा में टकराव और बहस
इस मुद्दे पर जब सदन में बहस जारी थी, तो दीया कुमारी और टीकाराम जूली के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने लगातार सवाल उठाए कि घोषणा और धरातल पर किए गए खर्च में भारी अंतर क्यों है, जबकि सरकार ने योजना को विस्तार देने और डीपीआर पर काम करने के तर्क दिए। सदन में यह बहस उच्च वोल्टेज ड्रामा में बदल गई, और विधानसभा अध्यक्ष को सदन कुशलता से संचालित कराने का निर्देश देना पड़ा।
समग्र रूप से यह बहस राजस्थान की सियासी परिस्थितियों और बजट प्रावधान तथा उसके वास्तविक लागू खर्च के बीच के अंतर को उजागर करती है। विपक्ष इसे सरकार की जवाबदेही और योजनाओं की वास्तविकता के परीक्षण का मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार इसे दीर्घकालिक परियोजना की समयबद्ध प्रक्रिया के रूप में समझा रही है।

