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ट्रेन की चपेट में आने से पशुओं की मौत से ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश

ट्रेन की चपेट में आने से पशुओं की मौत से ग्रामीणों में बढ़ा आक्रोश

पशु बाहुल्य क्षेत्र लाठी में लगातार ट्रेन हादसों का सिलसिला जारी है, जिसमें गाय, बकरी और ऊंट सहित दर्जनों पशु ट्रेन की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या अब केवल आर्थिक नुकसान का कारण नहीं रही, बल्कि उनके जीवन और पशुपालन पर भी गंभीर असर डाल रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रेलवे ट्रैक के किनारे अव्यवस्थित चरा और खुली चराई की वजह से पशु बार-बार रेलवे लाइन पर आ जाते हैं। इससे न केवल उनकी जान जोखिम में पड़ रही है, बल्कि ट्रेन संचालन में भी बाधा उत्पन्न होती है। ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में एक हादसे में तीन गाय और दो बकरियाँ ट्रेन की चपेट में आकर मारी गईं।

ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अभी तक रेलवे प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि यदि जल्द ही समाधान नहीं निकला, तो हादसे लगातार बढ़ सकते हैं। “हमारे पशु ही हमारी आमदनी का जरिया हैं। उनकी मौत से हमारी आजीविका भी खतरे में पड़ रही है,” एक स्थानीय किसान ने दुख जताते हुए कहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे ट्रैक के पास पशुओं के लिए उचित बैरियर या सुरक्षात्मक व्यवस्था की कमी इस समस्या का मुख्य कारण है। उन्होंने सुझाव दिया कि रेलवे और स्थानीय प्रशासन मिलकर ऐसी व्यवस्थाएँ करें जिससे ट्रेन और पशुओं के बीच टकराव की घटनाओं को रोका जा सके। इसके अलावा, पशुपालकों को भी जागरूक किया जाना चाहिए कि वे अपने पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें और रेलवे लाइन के पास चराने से बचें।

स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को गंभीरता से देखा जा रहा है। रेलवे विभाग ने बताया कि कुछ स्थानों पर शीघ्र ही सुरक्षात्मक बाड़ लगाने का काम शुरू किया जाएगा। इसके अलावा, सिग्नल और चेतावनी बोर्ड भी लगाए जाएंगे ताकि चालकगण समय रहते सावधान हो सकें।

ग्रामीणों का आक्रोश अब बढ़ता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला, तो वे प्रदर्शन और सड़क जाम जैसे कदम उठा सकते हैं। “हम अपनी आवाज़ उठाने से पीछे नहीं हटेंगे। हमारी सुरक्षा और हमारे पशुओं की सुरक्षा के लिए हमें कदम उठाने होंगे,” एक वरिष्ठ किसान ने कहा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ लाठी क्षेत्र की समस्या नहीं है। देश के कई पशु बाहुल्य क्षेत्रों में रेलवे ट्रैक के पास ऐसे हादसे होते रहते हैं। इस समस्या को समय रहते हल करना आवश्यक है, नहीं तो इससे न केवल पशुओं की मौत बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीणों की जीवन-यापन क्षमता भी प्रभावित होगी।

ग्रामीणों की अपील है कि प्रशासन जल्द ही इस ओर ध्यान दे और सुरक्षा के उपाय अपनाए जाएं। ताकि पशु और मानव दोनों की जान सुरक्षित रहे और ग्रामीणों को लगातार आर्थिक नुकसान का सामना न करना पड़े।

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