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मरीजों के हलक में जानलेवा सीवेज के बैक्टीरिया: भास्कर की लैब जांच में खुलासा, जयपुर सहित 3 जिलों के अस्पतालों का पानी पीने लायक नहीं
 

मरीजों के हलक में जानलेवा सीवेज के बैक्टीरिया: भास्कर की लैब जांच में खुलासा, जयपुर सहित 3 जिलों के अस्पतालों का पानी पीने लायक नहीं

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में पानी की जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जयपुर, सीकर और श्रीगंगानगर के एक दर्जन से ज्यादा अस्पतालों के पानी के नमूनों की जांच में कहीं सीवेज से जुड़े बैक्टीरिया मिले, तो कहीं नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक पाई गई। श्रीगंगानगर के रावला मंडी सीएचसी के पानी में 100 मिलीलीटर में 460 बैक्टीरिया मिलने की बात सामने आई है। वहीं, सीकर के जनाना अस्पताल के पानी में नाइट्रेट की मात्रा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर की बताई गई सीमा के मुकाबले 290 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज की गई।

राजस्थान के अस्पतालों में दूषित पानी का खतरा, जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

सरकारी अस्पतालों में मरीज इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन यदि वहीं पीने के पानी की गुणवत्ता खराब हो, तो यह उनकी सेहत के लिए अतिरिक्त जोखिम बन सकता है। खासकर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों के लिए सुरक्षित पानी बेहद जरूरी है।

जयपुर, सीकर और श्रीगंगानगर के अस्पतालों से जुड़े जांच नतीजों ने पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े किए हैं। पानी में सीवेज से जुड़े बैक्टीरिया की मौजूदगी संभावित संदूषण की ओर इशारा करती है। ऐसे पानी के सेवन से पेट और आंतों से संबंधित संक्रमण का खतरा हो सकता है। हालांकि, बैक्टीरिया की सटीक पहचान और उनकी प्रकृति जानने के लिए पूरी प्रयोगशाला रिपोर्ट जरूरी है।

सीकर के जनाना अस्पताल में नाइट्रेट तय सीमा से छह गुना ज्यादा

सीकर के जनाना अस्पताल के पानी में नाइट्रेट की मात्रा 290 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है, जबकि बताई गई सीमा 45 मिलीग्राम प्रति लीटर है। यह स्तर निर्धारित सीमा से छह गुना से भी अधिक है।

पेयजल में नाइट्रेट की अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय है। इसका जोखिम विशेष रूप से शिशुओं के लिए गंभीर हो सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में पानी के स्रोत की जांच, सुरक्षित पानी की वैकल्पिक व्यवस्था और दोबारा नमूने लेकर परीक्षण करना महत्वपूर्ण है।

रावला मंडी सीएचसी के पानी में मिले बैक्टीरिया

श्रीगंगानगर जिले के रावला मंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पानी के नमूने में 100 मिलीलीटर में 460 बैक्टीरिया मिलने की जानकारी दी गई है। यह निष्कर्ष पानी की गुणवत्ता की विस्तृत जांच और बैक्टीरिया की पहचान की जरूरत को रेखांकित करता है।

यदि पानी सीवेज से दूषित पाया जाता है, तो अस्पताल प्रशासन को संदूषण के स्रोत का पता लगाकर संबंधित टंकी, पाइपलाइन या जलापूर्ति व्यवस्था की जांच करानी चाहिए। साथ ही, मरीजों और उनके परिजनों को जांच के नतीजे स्पष्ट होने तक सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना जरूरी है।

टंकियों की सफाई और प्यूरीफायर की निगरानी कौन करेगा?

इन रिपोर्टों के बाद सबसे बड़ा सवाल अस्पतालों में पानी की नियमित जांच, टंकियों की सफाई और प्यूरीफायर के रखरखाव की व्यवस्था को लेकर है। अस्पतालों में पेयजल की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित परीक्षण, सफाई का रिकॉर्ड और खराबी सामने आने पर तुरंत सुधार जरूरी है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी में सभी प्रभावित अस्पतालों के नाम, नमूने लेने की तारीख और जांच के बाद हुई कार्रवाई का पूरा विवरण नहीं है। संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और सुधारात्मक कदम सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

अस्पतालों में स्वच्छ पेयजल केवल बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसलिए दूषित पानी की शिकायत या जांच रिपोर्ट मिलने पर जिम्मेदारी तय करने के साथ यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मरीजों को सुरक्षित पानी मिले और ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।

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