नौनिहालों का पेट भरने वाली महिलाओं के साथ ‘क्रूर मज़ाक’, 10 प्रतिशत बढ़ोतरी को बताया ऊंट के मुंह में जीरा
बच्चों के पोषण और प्रारंभिक देखभाल की जिम्मेदारी निभाने वाली महिला कर्मियों को लेकर घोषित 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि को लेकर व्यापक असंतोष देखने को मिल रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और कर्मचारियों ने इस बढ़ोतरी को “ऊंट के मुंह में जीरा” करार देते हुए इसे नाकाफी बताया है।
यह महिलाएं देशभर में आंगनवाड़ी केंद्रों और पोषण से जुड़े कार्यक्रमों के तहत नौनिहालों के स्वास्थ्य, पोषण और शुरुआती शिक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालती हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में इनका काम बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चलता है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद वे बच्चों के भविष्य की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं।
बढ़ोतरी से नहीं बदली स्थिति
हाल ही में घोषित 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि को लेकर उम्मीद की जा रही थी कि इससे इन कर्मियों को कुछ राहत मिलेगी, लेकिन वास्तविकता में इसे बेहद कम और प्रतीकात्मक बढ़ोतरी माना जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और काम के बोझ को देखते हुए यह वृद्धि किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं है।
कई महिला कर्मियों ने कहा कि उन्हें फील्ड में लगातार सर्वे, पोषण वितरण, रिकॉर्ड मेंटेनेंस और बच्चों की देखभाल जैसे कई कार्य करने पड़ते हैं, लेकिन इसके मुकाबले मिलने वाला मानदेय बेहद कम है। ऐसे में 10 प्रतिशत की वृद्धि उनके आर्थिक हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं ला सकती।
“क्रूर मज़ाक” जैसी प्रतिक्रिया
सामाजिक संगठनों और कर्मचारी प्रतिनिधियों ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह कदम जमीनी हकीकत से पूरी तरह अलग है। उनका कहना है कि जिन महिलाओं पर बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण की जिम्मेदारी है, उनके साथ यह एक तरह का “क्रूर मज़ाक” है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि कई वर्षों से मानदेय और सेवा शर्तों में बड़े सुधार की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार मामूली बढ़ोतरी देकर मुद्दे को टाल दिया जाता है। इससे न केवल कर्मियों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि कार्य की गुणवत्ता पर भी असर पड़ता है।
महंगाई के मुकाबले बेहद कम राहत
आर्थिक विशेषज्ञों का भी मानना है कि मौजूदा महंगाई दर को देखते हुए 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी वास्तविक राहत नहीं देती। किराया, खाद्य सामग्री और दैनिक खर्चों में लगातार वृद्धि के बीच यह वृद्धि प्रभावहीन साबित हो रही है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण, वेतन सुधार और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रही हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
सरकार से ठोस कदमों की मांग
महिला कर्मियों और संगठनों ने सरकार से अपील की है कि केवल प्रतीकात्मक बढ़ोतरी के बजाय एक व्यापक नीति तैयार की जाए, जिसमें वेतन, सुविधा और सामाजिक सुरक्षा को शामिल किया जाए। उनका कहना है कि जब वे देश के भविष्य यानी बच्चों के पोषण में योगदान दे रही हैं, तो उनके साथ न्यायपूर्ण व्यवहार होना चाहिए।

