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राजस्थान में PM पोषण कुक-कम-हेल्पर्स के मानदेय पर संकट, नई व्यवस्था से भुगतान अटका

राजस्थान में PM पोषण कुक-कम-हेल्पर्स के मानदेय पर संकट, नई व्यवस्था से भुगतान अटका

राजस्थान के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत हजारों पीएम पोषण कुक-कम-हेल्पर्स के मानदेय भुगतान को लेकर संकट खड़ा हो गया है। एसएनए स्पर्श पोर्टल पर लागू की गई नई व्यवस्था के कारण कुक-कम-हेल्पर्स को मिलने वाले पूरे मानदेय का भुगतान फिलहाल अटक गया है। मौजूदा स्थिति में इन्हें प्रतिमाह केवल एक हजार रुपए का मानदेय ही मिल सकेगा।

पीएम पोषण योजना के तहत सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और वितरण से जुड़े कार्यों में कुक-कम-हेल्पर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बदले उन्हें सरकार की ओर से निर्धारित मानदेय दिया जाता है। नई भुगतान व्यवस्था लागू होने के बाद अब पूरे मानदेय के भुगतान में तकनीकी और प्रशासनिक अड़चन सामने आई है।

एसएनए स्पर्श पोर्टल के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसी नई व्यवस्था के कारण वर्तमान में निर्धारित मानदेय की पूरी राशि जारी नहीं हो पा रही है। इससे प्रदेशभर में काम कर रहे हजारों कुक-कम-हेल्पर्स प्रभावित हो रहे हैं।

फिलहाल उपलब्ध व्यवस्था के तहत कुक-कम-हेल्पर्स को हर महीने एक हजार रुपए का भुगतान ही किया जाएगा। इससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय से स्कूलों में पीएम पोषण योजना से जुड़े कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए मानदेय ही आय का महत्वपूर्ण जरिया है।

कुक-कम-हेल्पर्स की ओर से पूरे मानदेय का भुगतान जल्द शुरू किए जाने की मांग उठ सकती है। उनका कहना है कि वे नियमित रूप से स्कूलों में भोजन तैयार करने, रसोई व्यवस्था संभालने और अन्य निर्धारित जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में भुगतान में देरी या पूरी राशि नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।

विभागीय स्तर पर एसएनए स्पर्श पोर्टल की नई व्यवस्था के कारण पैदा हुई समस्या को दूर करने के प्रयास किए जाने की उम्मीद है। यदि तकनीकी या प्रशासनिक प्रक्रिया जल्द पूरी होती है तो कुक-कम-हेल्पर्स को बकाया और निर्धारित मानदेय का भुगतान किया जा सकता है।

फिलहाल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में काम कर रहे हजारों पीएम पोषण कुक-कम-हेल्पर्स की नजर भुगतान व्यवस्था को लेकर होने वाले अगले निर्णय पर टिकी हुई है। जब तक नई व्यवस्था के तहत पूरी प्रक्रिया स्पष्ट नहीं होती, तब तक प्रतिमाह एक हजार रुपए के भुगतान की स्थिति बनी रहेगी।

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