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डॉग स्क्वायड पर संकट: अपराध बढ़ा, लेकिन ‘जांबाज’ यूनिट खुद संसाधनों की कमी से जूझ रही

डॉग स्क्वायड पर संकट: अपराध बढ़ा, लेकिन ‘जांबाज’ यूनिट खुद संसाधनों की कमी से जूझ रही

राजस्थान में अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस व्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच पुलिस का सबसे भरोसेमंद माना जाने वाला डॉग स्क्वायड (K9 यूनिट) गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है और संसाधनों की कमी के चलते इसकी कार्यक्षमता पर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार, अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला डॉग स्क्वायड कई बार घटनास्थलों पर समय पर नहीं पहुंच पा रहा है। प्रशिक्षण, देखभाल और आधुनिक उपकरणों की कमी को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डॉग स्क्वायड चोरी, हत्या, विस्फोटक सामग्री की तलाश और गुमशुदगी जैसे मामलों में बेहद अहम भूमिका निभाता है। लेकिन अगर इसे पर्याप्त संसाधन और नियमित प्रशिक्षण नहीं मिले, तो इसकी प्रभावशीलता कम हो सकती है।

पुलिस विभाग के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है कि बढ़ते अपराधों के बीच इस विशेष यूनिट को मजबूत करना जरूरी है। कई जिलों में सीमित संख्या में ही प्रशिक्षित डॉग और हैंडलर उपलब्ध हैं, जिससे पूरे राज्य में उनकी तैनाती प्रभावित होती है।

पुलिस विभाग के अधिकारी मानते हैं कि आधुनिक अपराध जांच में डॉग स्क्वायड एक महत्वपूर्ण उपकरण है, और इसे मजबूत करने के लिए बजट और ढांचे में सुधार की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अगर इस यूनिट को समय पर अपग्रेड नहीं किया गया, तो जांच प्रक्रिया की गति और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

फिलहाल यह मुद्दा प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में है और उम्मीद है कि आने वाले समय में डॉग स्क्वायड को मजबूत करने के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं।

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