राजस्थान में हाल ही में वार्ड परिसीमन का काम पूरा हुआ और इसकी रिपोर्ट जारी कर दी गई है। हालांकि, इस परिसीमन को लेकर पहले ही काफी विवाद और विरोध देखा जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट से अब सख्त खामियां भी उजागर हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों से पहले किए गए इस परिसीमन में एक ही परिवार के सदस्यों को अलग-अलग वार्डों में शामिल किया गया है। इससे न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं, बल्कि जनता और राजनीतिक दलों के बीच भ्रष्टाचार या पक्षपात की आशंका भी पैदा हो गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वार्ड परिसीमन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि पंचायत चुनाव निष्पक्ष और संतुलित हों। लेकिन, यदि परिसीमन में ऐसी अनियमितताएं सामने आती हैं, तो चुनाव प्रक्रिया पर भी संदेह उठता है और जनता का भरोसा प्रभावित होता है।
स्थानीय राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि पारदर्शिता बनाए रखने और संभावित त्रुटियों को सुधारने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि चुनाव से पहले किसी भी तरह की अनियमितता को दूर करना जरूरी है, ताकि लोकतंत्र की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
इस विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि वार्ड परिसीमन केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र और पंचायत चुनाव की निष्पक्षता से सीधे जुड़ा मामला है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करता है और भविष्य के चुनावों में इसे कैसे सुधारा जाता है।

