Samachar Nama
×

पन्नाधाय की जाति को लेकर उदयपुर में विवाद, गुर्जर समाज ने ‘भारत के नारी रत्न’ पुस्तक के तथ्यों पर जताई आपत्ति

पन्नाधाय की जाति को लेकर उदयपुर में विवाद, गुर्जर समाज ने ‘भारत के नारी रत्न’ पुस्तक के तथ्यों पर जताई आपत्ति

मेवाड़ के इतिहास में अपने पुत्र का बलिदान देकर राजवंश की रक्षा करने वाली वीरांगना पन्नाधाय की जाति को लेकर उदयपुर में नया विवाद खड़ा हो गया है। गुर्जर समाज ने पन्नाधाय को गुर्जर समुदाय से जुड़ा बताते हुए भारत सरकार की पुस्तक ‘भारत के नारी रत्न’ में उल्लेखित तथ्यों पर आपत्ति जताई है।

पन्नाधाय की पहचान को लेकर उठे सवाल

पन्नाधाय मेवाड़ के इतिहास की ऐसी वीर महिला मानी जाती हैं, जिन्होंने अपने कर्तव्य और त्याग का उदाहरण पेश करते हुए महाराणा उदयसिंह के जीवन की रक्षा की थी। उनके बलिदान की कहानी राजस्थान के इतिहास में विशेष स्थान रखती है। अब उनकी सामाजिक पहचान को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे हैं।

गुर्जर समाज ने जताई नाराजगी

गुर्जर समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि पन्नाधाय गुर्जर समाज से थीं और इतिहास की किताबों में उनके संबंध में सही जानकारी दर्ज होनी चाहिए। समाज ने भारत सरकार की पुस्तक में दिए गए विवरण पर आपत्ति जताते हुए तथ्यों में सुधार की मांग की है।

पुस्तक के उल्लेख को लेकर विरोध

समाज के लोगों का आरोप है कि पुस्तक में पन्नाधाय की जातीय पहचान को लेकर जो जानकारी दी गई है, वह उनके अनुसार सही नहीं है। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों से मामले की समीक्षा करने की मांग की है।

इतिहासकारों के मत पर भी चर्चा

पन्नाधाय के जीवन और सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर इतिहास में अलग-अलग मत मिलते रहे हैं। ऐसे में इस मुद्दे पर इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के बीच भी चर्चा होती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से जुड़े विषयों पर प्रमाणिक दस्तावेजों और शोध के आधार पर ही निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

विवाद के बीच सम्मान की बात

पन्नाधाय का बलिदान राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के इतिहास में त्याग और कर्तव्य की मिसाल माना जाता है। समाज के विभिन्न वर्ग उनके योगदान को सम्मान देते हैं। फिलहाल जातीय पहचान को लेकर उठे विवाद के बीच सभी की नजर इस बात पर है कि संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं।

Share this story

Tags