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 कांग्रेस का भाजपा पर जोरदार हमला, एक्सक्लूसिव फुटेज में देंखे गुप्त फॉर्म और नाम कटाई को लेकर उठाए सवाल

 कांग्रेस का भाजपा पर जोरदार हमला, एक्सक्लूसिव फुटेज में देंखे गुप्त फॉर्म और नाम कटाई को लेकर उठाए सवाल

राजस्थान में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोमवार को दिल्ली के AICC मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान भाजपा पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा राजस्थान में वोटिंग प्रक्रिया में गुप्त रूप से हेरफेर कर रही है।

गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि भाजपा राजस्थान में “वोट पर डाका डाल रही” है। उन्होंने बताया कि 13 जनवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीएमआर में रुकते हैं। इसके पहले 3 से 13 जनवरी के बीच भाजपा में गुप्त रूप से गतिविधियां चल रही थीं। डोटासरा ने आरोप लगाया कि इस दौरान हर विधानसभावार फर्जी कंप्यूटराइज्ड फॉर्म तैयार किए गए, जो वोटिंग प्रक्रिया में हेरफेर का प्रमाण हैं।

टीकाराम जूली ने भी भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि 9 जनवरी को भाजपा के 126 ब्लॉक लेवल अधिकारी (BLA) केवल 4 नाम काटने की एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर पाए थे। लेकिन 16 जनवरी तक यह आंकड़ा अचानक हजारों में बढ़ गया। उन्होंने बताया कि 16 जनवरी को भाजपा के 2133 लोगों ने 18,896 नाम कटाने की एप्लिकेशन लगाई। जूली ने सवाल उठाया कि ऐसा अचानक कैसे संभव हुआ और इसके पीछे क्या गुप्त मंशा थी।

दोनों नेताओं ने दिल्ली AICC मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मुद्दे पर भाजपा की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर खतरा मंडरा रहा है। कांग्रेस का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान इस तरह की गड़बड़ियों से वोटरों की वास्तविक पहचान प्रभावित हो सकती है और इससे राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश हो रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, SIR (Special Intensive Revision) किसी भी राज्य में वोटर लिस्ट और नामों की सही स्थिति सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। लेकिन राजनीतिक पार्टियों द्वारा इसके आंकड़ों में अचानक बदलाव और बड़ी संख्या में नाम कटाने के आवेदन विवादास्पद हो सकते हैं।

कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा से इस मामले में पूरी पारदर्शिता और जांच की मांग की। उनका कहना था कि अगर प्रक्रिया निष्पक्ष है तो भाजपा को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने मीडिया से अपील की कि इस मुद्दे पर जनता को पूरी जानकारी मिले और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की स्थिति सामने आए तो उसे समय रहते रोका जा सके।

राजस्थान में SIR विवाद ने राज्य की राजनीतिक लड़ाई को नई दिशा दे दी है। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह मुद्दा दोनों प्रमुख दलों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मामले में सार्वजनिक ध्यान बढ़ने के कारण भाजपा और कांग्रेस दोनों ही इसे चुनावी बहस का हिस्सा बना सकते हैं।

इस प्रकार, राजस्थान SIR विवाद ने राज्य में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। कांग्रेस के आरोपों के बाद भाजपा की प्रतिक्रिया और अधिकारियों की जांच रिपोर्ट आने तक यह मामला राजनीतिक हलचल का केंद्र बना रहेगा।

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