राजस्थान में शिक्षकों के तबादले पर असमंजस, शिक्षा मंत्री ने नीति पर अंतिम रूप लेने की बात कही
राजस्थान हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादले के एक मामले में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से तबादला नीति को लेकर जवाब मांगा था। वहीं, शुक्रवार (13 फरवरी) को राजस्थान विधानसभा में भी शिक्षकों के तबादले का मुद्दा जोर पकड़ा।
तबादला नीति पर स्थिति
विधानसभा में ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों पर उठे सवालों के जवाब में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि तबादला नीति बनाने की प्रक्रिया अभी जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीति का अंतिम रूप लेने के बाद ही व्यापक स्तर पर तबादलों पर निर्णय लिया जाएगा।
समयसीमा पर असमंजस
मंत्री ने यह भी कहा कि नीति तैयार होने के बाद शिक्षकों के तबादलों के लिए समयसीमा निर्धारित की जाएगी। फिलहाल, नीति की अधूरी प्रक्रिया के कारण शिक्षक और प्रशासन दोनों ही असमंजस की स्थिति में हैं।
हाई कोर्ट का निर्देश
राजस्थान हाई कोर्ट ने तबादला नीति को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकार स्पष्ट और पारदर्शी नीति बनाए ताकि शिक्षक वर्ग और शिक्षा विभाग दोनों को न्यायसंगत और सुव्यवस्थित प्रक्रिया मिल सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि नीति में किसी भी प्रकार का पक्षपात या अनियमितता नहीं होनी चाहिए।
शिक्षकों और प्रशासन की प्रतिक्रिया
शिक्षक संगठन और कर्मचारी प्रतिनिधियों का कहना है कि तबादला नीति साफ और समयबद्ध होनी चाहिए। इससे शिक्षकों को पदोन्नति, स्थानांतरण और करियर योजना में मदद मिलेगी। वहीं, प्रशासन भी नीति के अंतिम रूप तक बड़े स्तर पर तबादलों से बचने की योजना बना रहा है।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट और सुव्यवस्थित तबादला नीति न केवल शिक्षकों की मनोबल और कार्यकुशलता बढ़ाएगी, बल्कि शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पारदर्शिता और जनता के प्रति जिम्मेदारी भी सुनिश्चित करेगी।

