राजस्थान सहित पूरे देश में रामनवमी के पर्व को लेकर इस बार भक्तों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 26 मार्च को मनाने की बात कह रहे हैं, जबकि कई श्रद्धालु 27 मार्च को रामनवमी मनाने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर सही तिथि कौन-सी है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, रामनवमी भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है और यह चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ती है। इस वर्ष तिथि के समय और उदय-तिथि को लेकर मतभेद के कारण अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग दिन पूजा की जा रही है।
कई ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि उदय-तिथि के अनुसार 27 मार्च को रामनवमी मनाना अधिक उचित रहेगा, जबकि कुछ पंडितों के अनुसार तिथि का आरंभ 26 मार्च को ही हो रहा है, इसलिए उसी दिन भी पूजा की जा सकती है। इसी कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रामनवमी का व्रत और पूजा दोनों ही दिन किए जा सकते हैं, लेकिन मुख्य पूजा का समय और मुहूर्त अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। मंदिरों में भी इसी आधार पर अलग-अलग समय पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
राजस्थान के विभिन्न मंदिरों में रामनवमी को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और शोभायात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाने की तैयारी में जुटे हुए हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि श्रद्धालु अपने स्थानीय पंडित या पंचांग के अनुसार ही पूजा का सही समय निर्धारित करें, ताकि उन्हें व्रत और पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
कुल मिलाकर, रामनवमी की तिथि को लेकर भले ही असमंजस की स्थिति बनी हुई है, लेकिन भक्तों का उत्साह और आस्था पूरी तरह से कायम है। अब यह देखने वाली बात होगी कि लोग किस दिन अधिक संख्या में रामनवमी का पर्व मनाते हैं।

