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बूंदी में प्रशासन की सतर्कता से टला 7 मासूमों का बाल विवाह, बच्चियों ने काउंसलिंग में बयां की दर्दनाक सच्चाई

बूंदी में प्रशासन की सतर्कता से टला 7 मासूमों का बाल विवाह, बच्चियों ने काउंसलिंग में बयां की दर्दनाक सच्चाई

राजस्थान के बूंदी जिले के नीम का खेड़ा गांव में प्रशासन की सतर्कता से सात मासूम बच्चियों का बाल विवाह रुकवाया गया। 10 से 13 वर्ष की उम्र के बीच की इन बच्चियों को कम उम्र में विवाह के बंधन में बांधने की तैयारी चल रही थी, लेकिन समय रहते प्रशासन के हस्तक्षेप से उनकी जिंदगी अंधेरे में जाने से बच गई। इस घटना ने एक बार फिर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार प्रशासन को गांव में एक साथ कई बाल विवाह होने की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और बाल संरक्षण से जुड़ी टीमों ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की और सातों बच्चियों के विवाह रुकवा दिए। अधिकारियों की तत्परता से न केवल एक बड़ा सामाजिक अपराध रोका गया, बल्कि सात मासूमों के भविष्य को भी सुरक्षित किया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब बच्चियों की काउंसलिंग की गई। काउंसलर के सामने बच्चियों ने ऐसी सच्चाई बताई जिसने सभी को भावुक कर दिया। बच्चियों ने बताया कि उन्हें ‘नए घर’ जाने और अच्छे कपड़े पहनने के बहाने शादी के लिए तैयार किया गया था। कई बच्चियों को यह तक नहीं बताया गया था कि उनकी शादी कराई जा रही है।

काउंसलिंग के दौरान सामने आया कि अपनों ने ही उनके सपनों को कुचलने की कोशिश की थी। जिन पर भरोसा था, उन्हीं परिजनों ने परंपरा और सामाजिक दबाव के नाम पर उनकी मासूमियत और भविष्य को दांव पर लगा दिया। बच्चियों ने पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने की इच्छा जताई और कम उम्र में शादी से साफ इनकार किया। मासूमों की यह पीड़ा सुनकर अधिकारी भी भावुक हो गए।

प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह प्रतिषेध कानून के तहत यह गंभीर अपराध है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले में संबंधित परिजनों और आयोजन में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही बच्चियों की सुरक्षा और शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।

अधिकारियों का कहना है कि बच्चियों की काउंसलिंग जारी रहेगी ताकि वे मानसिक रूप से मजबूत हो सकें और उनके भविष्य को बेहतर दिशा दी जा सके। बाल संरक्षण इकाइयों को भी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं, ताकि दोबारा ऐसी कोशिश न हो।

यह मामला केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का भी विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी जागरूकता की कमी और पुरानी परंपराओं के चलते बाल विवाह जैसी कुप्रथाएं पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई हैं। ऐसे में प्रशासनिक सख्ती के साथ सामाजिक भागीदारी भी जरूरी है।

नीम का खेड़ा में प्रशासन की सतर्कता से सात मासूमों की जिंदगी संवरने का मौका मिला है। यह घटना एक संदेश भी है कि बेटियों के सपनों को परंपरा के नाम पर कुचला नहीं जा सकता। समय रहते हस्तक्षेप ने इन बच्चियों को नया भविष्य दिया है।

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