पतंग लूटते समय 45 फीट गहरे बोरवेल में गिरा बच्चा, पांच घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन
सोमवार शाम पतंग लूटने के दौरान एक बच्चा अचानक खुले बोरवेल में गिर गया। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। बच्चे के करीब 45 फीट नीचे फंसे होने की जानकारी मिलने पर प्रशासन और पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ की टीम के साथ ग्रामीणों ने भी मोर्चा संभाला। करीब पांच घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कराया। बोरवेल की गहराई अधिक होने के कारण बच्चे तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। रेस्क्यू टीमों ने पूरी सावधानी के साथ अभियान आगे बढ़ाया, ताकि बच्चे को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।
पतंग लूटने के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम बच्चा पतंग लूटने के दौरान उस स्थान तक पहुंच गया, जहां बोरवेल खुला हुआ था। इसी दौरान वह उसमें गिर गया। आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल इसकी सूचना प्रशासन और पुलिस को दी।
बच्चे के बोरवेल में गिरने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई और प्रशासन ने बचाव अभियान के लिए आवश्यक संसाधन मौके पर भेजे।
45 फीट नीचे फंसा था बच्चा
बताया गया कि बच्चा बोरवेल में करीब 45 फीट नीचे फंस गया था। इतनी गहराई में फंसे बच्चे को बाहर निकालना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी चुनौती थी। मौके पर पहुंची प्रशासन और पुलिस की टीमों ने स्थिति का आकलन करने के बाद बचाव अभियान शुरू किया।
एनडीआरएफ की टीम को भी ऑपरेशन में लगाया गया। टीम ने विशेषज्ञों की मदद से बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान ग्रामीणों ने भी रेस्क्यू टीमों का सहयोग किया।
पांच घंटे तक चला बचाव अभियान
बच्चे को बाहर निकालने के लिए करीब पांच घंटे तक लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अभियान के दौरान प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ और ग्रामीणों की टीमें लगातार मौके पर मौजूद रहीं।
बचाव अभियान के दौरान सबसे बड़ी प्राथमिकता बच्चे की सुरक्षा रही। रेस्क्यू टीमों ने जल्दबाजी करने के बजाय पूरी सावधानी के साथ अभियान को आगे बढ़ाया। लंबे समय तक चले ऑपरेशन के कारण मौके पर लोगों की भीड़ जमा रही और हर कोई बच्चे के सुरक्षित बाहर आने की उम्मीद लगाए रहा।
खुले बोरवेल को लेकर फिर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर खुले और अनुपयोगी बोरवेल को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में कई जगह पुराने या इस्तेमाल में नहीं आने वाले बोरवेल खुले पड़े रहते हैं, जो बच्चों और अन्य लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
ऐसे हादसों से बचने के लिए खुले बोरवेल को तत्काल बंद कराने और उनकी नियमित निगरानी की जरूरत है। प्रशासन के सामने भी अब ऐसे स्थानों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित कराने की चुनौती है।
बच्चे के बोरवेल में गिरने के बाद करीब पांच घंटे चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन ने प्रशासन और ग्रामीणों की संयुक्त कोशिश को सामने रखा। हादसे ने यह भी याद दिलाया कि खुले बोरवेल को लेकर थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

