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दिल्ली जिमखाना पर केंद्र का बड़ा फैसला, 5 जून तक खाली करने का नोटिस; महाराष्ट्र सरकार भी हुई सक्रिय

दिल्ली जिमखाना पर केंद्र का बड़ा फैसला, 5 जून तक खाली करने का नोटिस; महाराष्ट्र सरकार भी हुई सक्रिय

देश के प्रतिष्ठित क्लबों में शामिल दिल्ली जिमखाना क्लब को केंद्र सरकार की ओर से 5 जून तक परिसर खाली करने का नोटिस दिए जाने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार ने रक्षा ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है। इस फैसले के बाद महाराष्ट्र सरकार भी सक्रिय हो गई है, क्योंकि मुंबई स्थित ऐतिहासिक बॉम्बे जिमखाना को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार का मानना है कि दिल्ली जिमखाना का परिसर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थित है और भविष्य की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए इस भूमि का उपयोग रक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है। इसी कारण क्लब प्रबंधन को तय समयसीमा के भीतर परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया है।

दिल्ली जिमखाना देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में गिना जाता है। यहां कई वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व सैन्य अधिकारी, राजनेता और कारोबारी सदस्य रहे हैं। ऐसे में केंद्र के इस फैसले ने क्लब सदस्यों और राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।

वहीं इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र सरकार भी सतर्क हो गई है। मुंबई का बॉम्बे जिमखाना, जिसकी स्थापना वर्ष 1875 में हुई थी, देश के सबसे पुराने औपनिवेशिक दौर के क्लबों में शामिल है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाला यह क्लब मुंबई की पहचान माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार राज्य के पुराने संस्थानों और उनकी जमीनों से जुड़े मामलों की समीक्षा कर रही है ताकि भविष्य में किसी तरह की स्थिति से निपटा जा सके।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार का यह कदम केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि सुरक्षा रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। हालांकि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से पारदर्शिता की मांग कर रहा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इतने पुराने और प्रतिष्ठित संस्थानों को लेकर फैसले लेते समय सभी पक्षों से चर्चा होनी चाहिए।

क्लब से जुड़े कुछ सदस्यों ने भी चिंता जताई है कि इस फैसले से एक ऐतिहासिक विरासत प्रभावित हो सकती है। उनका कहना है कि दिल्ली जिमखाना केवल एक क्लब नहीं बल्कि देश के प्रशासनिक और सामाजिक इतिहास का हिस्सा रहा है।

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से सुरक्षा कारणों को प्राथमिकता देने की बात कही जा रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा चर्चा में रह सकता है, खासकर तब जब अन्य पुराने क्लबों और संस्थानों की जमीनों को लेकर भी सरकार की नीति स्पष्ट होगी।

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