1923 से राजस्थान का बजट इतिहास: जयपुर रियासत में वित्त मंत्रालय और वार्षिक बजट की शुरुआत
राजस्थान के बजट इतिहास में 1923 का साल एक महत्वपूर्ण मोड़ रहा। उस समय तत्कालीन जयपुर रियासत के तहत करीब डेढ़ हजार गांव और 11 निजामतें थीं। इसी वर्ष वित्त मंत्रालय की स्थापना की गई और वार्षिक बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
इतिहासकारों के अनुसार, उस समय जयपुर के राजा सवाई मानसिंह कम उम्र में सत्ता में आए थे, जबकि प्रशासनिक शक्ति अंग्रेजों के हाथ में थी। ऐसे संवेदनशील राजनीतिक माहौल में भी वित्तीय व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए बजट का निर्माण हर साल अनिवार्य कर दिया गया।
जब बजट की शुरुआत हुई, तब प्रतिवर्ष मार्च के पहले ही इसे तैयार कर लिया जाता था। इसका उद्देश्य था कि रियासत के प्रशासनिक और विकास कार्य बिना किसी व्यवधान के पूरे साल संचालित हो सकें। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास, कर संग्रह और प्रशासनिक खर्चों का ध्यान रखते हुए यह बजट बनाया जाता था।
विशेषज्ञों का कहना है कि उस समय बजट तैयार करना केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं था, बल्कि यह सत्ता और प्रशासन की जिम्मेदारी दिखाने का माध्यम भी था। अंग्रेजों के प्रभाव में रहते हुए रियासत के अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि राज्य की आर्थिक गतिविधियां सुचारू रूप से चलती रहें और राजस्व का सही प्रबंधन हो।
इस तरह, 1923 में जयपुर रियासत में वित्त मंत्रालय की स्थापना और बजट की परंपरा ने राजस्थान में आधुनिक वित्तीय प्रशासन की नींव रखी। यह प्रथा धीरे-धीरे पूरे राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में भी फैल गई और आज के बजट इतिहास की मजबूत आधारशिला बन गई।
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